जरुरी जानकारी | बीते साल कृषि निर्यात 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ तीन लाख करोड़ रुपये पर : कोविंद

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश से कृषि उत्पादों का निर्यात बीते वित्त वर्ष (2020-21) में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ तीन लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, 31 जनवरी देश से कृषि उत्पादों का निर्यात बीते वित्त वर्ष (2020-21) में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ तीन लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के किसानों को सशक्त बनाने के लिए निरंतर काम कर रही है। ‘‘वैश्विक महामारी के बावजूद 2020-21 में किसानों ने 30 करोड़ टन से अधिक खाद्यान्न और 33 करोड़ टन से अधिक बागवानी उत्पादों का उत्पादन किया है।’’

उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड उत्पादन के बीच सरकारी खरीद भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ‘‘रबी की फसल के दौरान 433 लाख टन गेहूं की खरीद की गई जिससे लगभग 50 लाख किसानों को सीधा फायदा पहुंचा है। वहीं खरीफ की फसल के दौरान रिकॉर्ड 900 लाख टन धान की खरीद की गई, जिससे एक करोड़ तीस लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।’’

अपने अभिभाषण में कोविंद ने कहा कि बागवानी और शहद उत्पादन भी किसानों को सशक्त करने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। ‘‘शहद उत्पादन को प्रोत्साहन देने से 2020-21 में देश का शहद उत्पादन 1.25 लाख टन पर पहुंच गया है, जो कि 2014-15 की तुलना में करीब 55 प्रतिशत ज्यादा है। 2014-15 की तुलना में शहद के निर्यात में भी 102 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है।’’

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान दुनिया के बड़े-बड़े देश खाद्यान्न संकट और भुखमरी से जूझते रहे हैं, लेकिन भारत सरकार ने इस बात का पूरा प्रयास किया कि देश का कोई गरीब भूखा न रहे।

कोविंद ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सरकार सभी गरीबों को हर महीने मुफ्त राशन दे रही है। 80 करोड़ लाभार्थियों को 19 माह के दौरान सरकार ने मुफ्त अनाज देने पर 2.60 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं और आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम चला रहा है।

राष्ट्रपति ने बताया कि सरकार ने मुफ्त अनाज वितरण की इस योजना को मार्च, 2022 तक बढ़ा दिया है।

उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाने के लिए भी सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ‘‘इस दिशा में सरकार ने किसान रेल सेवा शुरू की है। कोरोना काल में भारतीय रेल ने सब्जियों, फलों तथा दूध जैसी, जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री के परिवहन के लिए 150 से अधिक मार्गों पर 1,900 से ज्यादा किसान रेल चलाईं और करीब छह लाख टन कृषि उत्पादों की ढुलाई की।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि देश के 80 प्रतिशत कृषक छोटे किसान हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से 11 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को 1.80 लाख करोड़ रुपये उनके खातों में स्थानांतरित किए गए हैं। ‘‘इसके अलावा एक लाख करोड़ रुपये के कृषि संरचना कोष के तहत हजारों परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा सरकार ने देश को खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 11,000 करोड़ रुपये की लागत से खाद्य तेल-पाम तेल राष्ट्रीय मिशन शुरू किया है।

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