विदेश की खबरें | नाटो सम्मेलन में स्वीडन को सदस्य बनाने पर सहमति, यूक्रेन पर मतभेद
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने अपने देश के उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में प्रवेश के लिए कोई समयसीमा निर्धारित नहीं होने पर अप्रसन्नता जताई।

बाइडन ने नाटो के सम्मेलन को ‘ऐतिहासिक क्षण’ बताया और कहा कि अमेरिका यूक्रेन की सदस्यता के मार्ग को रेखांकित करने के प्रस्ताव पर सहमत हो गया। इस प्रस्ताव को अभी सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है।

हालांकि, नाटो के सम्मेलन में शामिल होने के लिए विलनियस जा रहे जेलेंस्की ने बातचीत के तरीके पर निराशा जताई।

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘हम अपने सहयोगियों को महत्व देते हैं। यूक्रेन भी सम्मान का हकदार है।’’

जेलेंस्की ने कहा, ‘‘यूक्रेन को आमंत्रित करने और उसकी सदस्यता के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं किया जाना अभूतपूर्व और बेतुका है। अनिश्चितता कमजोरी होती है। और मैं सम्मेलन में इस पर खुलकर बात रखूंगा।’’

यूक्रेन के राष्ट्रपति की ओर से सार्वजनिक नाराजगी विलनियस में तनाव का माहौल बना सकती है। पश्चिमी देश जेलेंस्की को रूस के हमले के दौरान उनके नेतृत्व के लिए नायक की संज्ञा दे चुके हैं।

सम्मेलन के उद्घाटन से पहले सोमवार रात को तुर्किये ने स्वीडन के नाटो में शामिल होने पर अपनी आपत्तियों को वापस ले लिया। पश्चिमी देशों के नेता यूक्रेन पर रूस के हमले के मद्देनजर इसी तरह की एकजुटता का प्रदर्शन चाह रहे थे।

कई दिन तक गहन मंथन के बाद इस समझौते पर पहुंचा गया है और इससे उत्तरी यूरोप में नाटो की शक्ति बढ़ सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘नाटो की एकता खत्म होने की अफवाहों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।’’

समझौते की घोषणा के समय जारी संयुक्त बयान के अनुसार तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन अपने देश की संसद से स्वीडन के नाटो में शामिल होने पर मुहर लगाने को कहेंगे। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान भी इसी तरह का रुख अपना सकते हैं।

यह स्थिति बाइडन के लिए भी सफलता वाली है जिन्होंने कहा कि नाटो के विस्तार को इस बात के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है कि यूक्रेन पर हमला किस तरह रूस पर भारी पड़ा है।

फिनलैंड पहले ही नाटो का 31वां सदस्य बन चुका है और स्वीडन 32वां सदस्य बनने जा रहा है।

उधर रूस के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने संवाददाताओं से कहा कि नाटो का विस्तार उन कारणों में शामिल है जिसकी वजह से मौजूदा हालात बने।

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