देश की खबरें | अमेरिका और तालिबान के बीच शांति पर समझौता कमजोर था : अब्दुल्ला अब्दुल्ला
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्ववर्ती अफगान सरकार के तहत राष्ट्रीय सुलह के लिए परिषद के अध्यक्ष अब्दुल्ला अब्दुल्ल ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और तालिबान के बीच शांति के मुद्दे पर समझौता कमजोर था।
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर पूर्ववर्ती अफगान सरकार के तहत राष्ट्रीय सुलह के लिए परिषद के अध्यक्ष अब्दुल्ला अब्दुल्ल ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका और तालिबान के बीच शांति के मुद्दे पर समझौता कमजोर था।
उन्होंने कहा कि इसने चुनावी धांधली, भ्रष्टाचार और पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी तथा अन्य नेतृत्व के बीच अविश्वास जैसे अन्य कारकों के साथ देश को इस स्थिति में पहुंचा दिया।
अब्दुल्ला ने देश छोड़ कर भागने को लेकर गनी को गद्दार करार देते हुए कहा कि गनी की तरह जाना एक राष्ट्रीय गद्दार के साथ जाने जैसा है, ‘‘जो मैं अपने जीवन में कभी नहीं करूंगा’’
उन्होंने इंडिया टुडे कॉनक्लेव 2021 में वीडियो लिंक के जरिए कहा, ‘‘मैं देश का नागरिक हूं और मैं शासन में किसी भूमिका की उम्मीद नहीं करता। मैं लोगों के साथ रहने के लिए ही यहां रूका और मेरा आवास लोगों के लिए एक पता है और मैं देश के बाहर के दोस्तों से भी संपर्क में हूं। ’’
अफगानिस्तान के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा में हुआ समझौता शांति के मुद्दे पर कमजोर था।
तालिबान के संरक्षण के तहत अफगानिस्तान से आतंकवादी हमलों को लेकर भारत की चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि शुरूआती चीज उससे (तालिबान सरकार से) संपर्क रखना होगा और इन चिंताओं को उसके समक्ष सीधे तौर पर उठाना होगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह आगे बढ़ने का रास्ता होगा।’’
पाकिस्तान के साथ तालिबान के करीबी संबंधों पर उन्होंने कहा कि तालिबान का पड़ोसी देश के साथ करीबी संबंध रहा है जो तीन दशक पुराना है।
उन्होंने काबुल की स्थिति के बारे में कहा कि देशभर में मानवीय संकट बहुत गंभीर है। देश को मानवीय सहायता की जरूरत है।
शुक्रवार को अफगानिस्तान के कुंदुज प्रांत में एक मस्जिद में हुए विस्फोट की घटना पर उन्होंने कहा , ‘‘हम दाइश (आईएसआईएस) के देश में पैर पसारने के साथ सुरक्षा चिंताओं का सामना कर रहे हैं।’’
वहीं, एक अन्य सत्र में सीआईए के पूर्व निदेशक डेविड पेट्रायस ने कहा कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जा कर लेने की खुशी पाकिस्तान में कम समय तक ही रहेगी।
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