नयी दिल्ली, 14 जून थल सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने मंगलवार को कहा कि ‘अग्निपथ’ योजना के क्रियान्वयन के चलते चीन और पाकिस्तान की सीमाओं के पास सेना की परिचालन क्षमताओं और तैयारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को थल सेना, नौसेना और वायुसेना में सैनिकों की भर्ती के लिए एक नयी ‘अग्निपथ योजना’ का ऐलान किया। इसके तहत बढ़ते वेतन और पेंशन खर्च को कम करने के लिए संविदा के आधार पर अल्पकाल के लिए सैनिकों की भर्ती की जएगी, जिन्हें ‘अग्निवीर’ कहा जाएगा।
जनरल पांडे ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा, ‘‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि अग्निपथ योजना के कार्यान्वयन के दौरान सीमाओं पर सेना की परिचालन क्षमता और तैयारियां तथा आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की उसकी क्षमता पूरी तरह से बरकरार रहेगी।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या नयी योजना के लागू होने से चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर सेना की तैयारियां प्रभावित होंगी, उन्होंने जोर दिया कि समग्र सैन्य तैयारियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सेना प्रमुख ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि भर्ती प्रक्रिया में बदलाव से बल में ‘‘नया जोश और आत्मविश्वास’’ आएगा।
सशस्त्र बलों में इस साल 46,000 अग्निवीरों की भर्ती की जाएगी। योजना के तहत भर्ती के लिए प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर शुरू की जाएगी।
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