देश की खबरें | पहली बार मतदान करने के बाद पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों ने कहा : आखिरी इच्छा पूरी हुई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जम्मू में जिला विकास परिषद (डीडीसी) के तीसरे चरण के चुनाव में वोट डालने के बाद अपनी उंगली पर लगी स्याही को देखकर 87 वर्षीय लाल चंद और उनकी 82 वर्षीय पत्नी त्रिविता की आंखों में आंसू आ गए।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

चक जफर (जम्मू), चार दिसंबर जम्मू में जिला विकास परिषद (डीडीसी) के तीसरे चरण के चुनाव में वोट डालने के बाद अपनी उंगली पर लगी स्याही को देखकर 87 वर्षीय लाल चंद और उनकी 82 वर्षीय पत्नी त्रिविता की आंखों में आंसू आ गए।

दंपति ने कहा कि जीवन में एक बार मतदान करने की हमारी इच्छा आज पूरी हो गई ।

यह भी पढ़े | हैदराबाद GHMC चुनाव में टीआरएस 55 , बीजेपी 48, AIMIM 44 और कांग्रेस को 2 सीटों पर मिली जीत: 4 दिसंबर 2020 की बड़ी खबरें और मुख्य समाचार LIVE.

लालचंद और उनकी पत्नी पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थी हैं जो 1947 में विभाजन के दौरान भारत आ गए थे। पिछले साल पांच अगस्त को केंद्र द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के बाद लगभग 1.50 लाख अन्य लोगों को जम्मू-कश्मीर के स्थानीय चुनावों में मतदान करने की योग्यता हासिल हुई है।

14 वर्ष की उम्र में 1947 में पश्चिम पाकिस्तान से भागे लालचंद ने कहा कि मैंने अपने जीवन में पहली बार मतदान किया है।

यह भी पढ़े | किसके आदेश पर लालू प्रसाद यादव को रिम्स निदेशक के बंगले में स्थानांतरित किया गया: उच्च न्यायालय.

उन्होंने कहा, 'हमारी अंतिम इच्छा पूरी हो गई है।”

उनके गांव चक जाफर में कई अन्य पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों के घर में उत्सव का माहौल है।

पाकिस्तान शरणार्थी एक्शन कमेटी के अध्यक्ष लाबा राम गांधी ने कहा, ‘‘हम इन चुनावों में मतदान करके बहुत खुश हैं। यह पूरे देश के लिए संदेश है कि सात दशक बाद हमारे साथ न्याय हुआ है। आज हमें हमारी आजादी मिली है।”

ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को उनका हक दिलाने के लिए धन्यवाद दिया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\