देश की खबरें | शंभू बॉर्डर पर जत्थे को रोके जाने के बाद किसानों ने एक दिन के लिए मार्च स्थगित किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पंजाब-हरियाणा सीमा पर आंसू गैस के गोले लगने से कुछ किसानों के घायल होने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली की ओर अपना पैदल मार्च शुक्रवार को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।
शंभू (पंजाब), छह दिसंबर पंजाब-हरियाणा सीमा पर आंसू गैस के गोले लगने से कुछ किसानों के घायल होने के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली की ओर अपना पैदल मार्च शुक्रवार को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया।
इससे पहले, 101 किसानों के एक जत्थे ने शुक्रवार को दिल्ली के लिए पैदल मार्च शुरू किया, लेकिन उन्हें कुछ मीटर बाद ही हरियाणा के सुरक्षा कर्मियों द्वारा लगाए गए बहुस्तरीय अवरोधक के कारण रूकना पड़ा। जब कुछ किसान अवरोधकों के पास पहुंच गए, तो सुरक्षाकर्मियों ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
कुछ किसान सड़क से लोहे की कीलें और कंटीले तार उखाड़ते नजर आए और उन्होंने धुएं से बचने के लिए गीले जूट के बोरे से अपने चेहरे ढके हुए थे।
‘सतनाम वाहेगुरु’ का उद्घोष करते हुए और अपने यूनियन के झंडे थामे हुए जत्थे के कई किसानों ने शुरुआती अवरोधकों को आसानी से पार कर लिया, लेकिन आगे नहीं बढ़ सके।
विभिन्न किसान यूनियन के झंडे थामे कुछ किसानों ने घग्गर नदी पर बनाए गए पुल पर सुरक्षाकर्मियों द्वारा लगाई गई लोहे की जाली को नीचे धकेल दिया। प्रदर्शनकारियों में से एक टिन शेड की छत पर चढ़ गया, जहां सुरक्षा बल तैनात थे। उसे नीचे उतरने के लिए मजबूर किया गया।
शंभू बॉर्डर पर पानी की बौछारें करने वाले वाहन भी तैनात किए गए हैं। हरियाणा पुलिस ने किसानों से आगे न बढ़ने को कहा और अंबाला जिला प्रशासन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू होने का हवाला दिया।
एक किसान नेता ने दावा किया कि हरियाणा के सुरक्षाकर्मियों द्वारा आंसू गैस के गोले दागे जाने के कारण पांच से छह प्रदर्शनकारी किसान घायल हो गए। बाद में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि किसानों के घायल होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने शुक्रवार को दिल्ली की ओर अपना पैदल मार्च स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि घायल किसानों को अस्पताल ले जाया गया।
पंधेर ने कहा, ‘‘कुछ किसानों के घायल होने के मद्देनजर हमने आज के लिए जत्था वापस बुला लिया है।’’
उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के दो मंच संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा, एक बैठक के बाद अगले कदम के बारे में फैसला करेंगे।
इससे पहले, पंधेर ने मार्च शुरू करने वाले 101 किसानों को ‘मरजीवड़ा’ (ऐसे लोग, जो किसी मकसद के लिए जान भी देने को तैयार हों) कहा था। पंधेर ने हरियाणा प्रशासन द्वारा पैदल मार्च पर रोक लगाए जाने की आलोचना की।
किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी के लिए केंद्र पर दबाव बनाने को लेकर दिल्ली की ओर मार्च कर रहे हैं।
हरियाणा सरकार ने शुक्रवार को अंबाला जिले के 11 गांवों में मोबाइल इंटरनेट और एक साथ कई लोगों को संदेश भेजने की सुविधा ‘बल्क एसएमएस सेवा’ पर नौ दिसंबर तक रोक लगा दी। अंबाला के डंगडेहरी, लोहगढ़, मानकपुर, ददियाना, बारी घेल, लार्स, कालू माजरा, देवी नगर, सद्दोपुर, सुल्तानपुर और काकरू गांवों में प्रतिबंध लागू कर दिया गया।
अंबाला प्रशासन ने जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है।
पंधेर ने बृहस्पतिवार को कहा कि अगर सरकार उन्हें मार्च निकालने से रोकती है, तो यह उनके लिए ‘‘नैतिक जीत’’ होगी। उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र और राज्यों में उनके नेता नियमित रूप से कहते रहे हैं कि अगर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली नहीं लाते हैं, तो कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इसलिए अगर हम पैदल दिल्ली जाते हैं, तो किसानों को रोकने का कोई कारण नहीं होना चाहिए।’’
किसानों ने शंभू और खनौरी सीमा पर सिख गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस भी मनाया।
इस बीच, एसकेएम नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने शुक्रवार को खनौरी सीमा बिंदु पर अपना आमरण अनशन जारी रखा।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले एकत्र हुए किसान मांग कर रहे हैं कि केंद्र उन्हें एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी दे।
सुरक्षा बलों द्वारा दिल्ली की ओर मार्च करने से रोके जाने के बाद वे 13 फरवरी से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। किसान एमएसपी के अलावा कर्ज माफी, किसानों एवं खेत मजदूरों के लिए पेंशन और बिजली दरों में बढ़ोतरी न करने की मांग कर रहे हैं।
वे 2021 की लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए ‘‘न्याय’’, भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को बहाल करने और 2020-21 में पिछले आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने की भी मांग कर रहे हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 06, 2024 06:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

