विदेश की खबरें | ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच करार के बाद चागोस द्वीप के विस्थापितों को है डर: वे कभी अपने घर नहीं लौट पायेंगे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. दुगासे (68) ने अपना अधिकांश जीवन सेशेल्स और ब्रिटेन में बिताया है। हिंद महासागर के द्वीपों के सैकड़ों अन्य मूल निवासियों की तरह दुगासे को भी आधी सदी से भी पहले तब उनके मूल निवास स्थान से निकाल दिया गया था, जब ब्रिटिश और अमेरिकी सरकारों ने वहां एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा बनाने का फैसला किया था।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

दुगासे (68) ने अपना अधिकांश जीवन सेशेल्स और ब्रिटेन में बिताया है। हिंद महासागर के द्वीपों के सैकड़ों अन्य मूल निवासियों की तरह दुगासे को भी आधी सदी से भी पहले तब उनके मूल निवास स्थान से निकाल दिया गया था, जब ब्रिटिश और अमेरिकी सरकारों ने वहां एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा बनाने का फैसला किया था।

‘घर लौटने’ के अधिकार के लिए वर्षों तक संघर्ष करने के बाद, दुगासे और अन्य विस्थापित द्वीपवासियों ने बृहस्पतिवार को तब निराशा ही नजर आयी, जब ब्रिटेन की सरकार ने घोषणा की कि वह चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता औपचारिक रूप से मॉरीशस को हस्तांतरित कर रही है।

भले ही, राजनीतिक नेता अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और भूराजनीति के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन इस समझौते का चागोसवासियों के लिए केवल एक ही अर्थ था: कि अपने मूल निवास स्थान में वापस जाकर रहने की संभावना अब पहले से कहीं अधिक दूर लगती है।

दुगासे ने कहा, ‘‘हम मूल निवासी हैं। हम वहीं के हैं।’’

वह अनिच्छा से लंदन के दक्षिण में एक शहर क्रॉले में बस गयी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इससे मुझे गुस्सा आया क्योंकि मैं घर जाना चाहती हूं।’’

एपी

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