नयी दिल्ली, एक जुलाई कोल इंडिया के श्रमिक संगठनों ने बुधवार को कहा कि सरकार के साथ उनकी समझौता वार्ता विफल हो गयी है और वे बृहस्पतिवार से प्रस्तावित तीन दिन की हड़ताल के अपने फैसल पर कायम हैं।
यूनियने कोयला क्षेत्र में निजी करोबारियों के प्रवेश का विरोध कर रही हैं।
हिंद मजदूर सभा (एचएमएस) से संबद्ध हिंद खदान मजदूर फेडरेशन के अध्यक्ष नाथूलाल पांडे ने कहा कि कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी और ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों के बीच वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये बुधवार बात हुई।
पांडे ने कहा, ‘‘मंत्री ने वाणिज्यिक खनन के फैसले को वापस लेने की मांग को स्वीकार्य नहीं किया। इसीलिए श्रमिक संगठनों के पास अब दो से चर जुलाई के बीच तीन दिन की हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।’’
बैठक के दौरान मंत्री ने ट्रेड यूनियन के नेताओं से कहा कि वाणिज्यिक खनन जरूरी है क्योंकि कोल इंडिया अकेले देश की कोयला मांग को पूरा नहीं कर पाएगी।
हालांकि जोशी ने आश्वस्त किया कि सरकार कोल इंडिया को मजबूत बनाना चाहती है।
पांडे ने सभी कोयला कर्मचारियों और केंद्रीय श्रमिक संगठनों से हड़ताल को सफल बनाने की अपील की।
इससे पहले,मंगलवार को मंत्री ने ट्रेड यूनियनों से हड़ताल पर नहीं जाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि उनकी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में विनिवेश या कोल इंडिया की इकाई सीएमपीडीआईएल को अलग करने की कोई योजना नहीं है।
श्रमिक संगठनों ने कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिये खोले जाने और कोल इंडिया से खोज, नियोजन और डिजाइन इकाई सीएमपीडीआईएल को अलग करने के विरोध में हड़ताल का आह्वान किया है।
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