विदेश की खबरें | अफगान तालिबान के साथ 'संपर्क और संचार' बनाए हुए हैं: चीन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. चीन ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह तालिबान के साथ ‘‘संपर्क और संचार’’ बनाए हुए है और अफगानिस्तान में उसके सत्ता पर काबिज होने के बाद उनके कार्यों पर ‘‘निष्पक्ष निर्णय’’ किया जाना चाहिए। इसने कहा कि तालिबान ज्यादा ‘‘स्पष्टवादी तथा विवेकशील’’ हो गया है और उम्मीद जताई कि महिलाओं के अधिकार सहित वे अपने वादे पूरा करेंगे।

बीजिंग, 19 अगस्त चीन ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह तालिबान के साथ ‘‘संपर्क और संचार’’ बनाए हुए है और अफगानिस्तान में उसके सत्ता पर काबिज होने के बाद उनके कार्यों पर ‘‘निष्पक्ष निर्णय’’ किया जाना चाहिए। इसने कहा कि तालिबान ज्यादा ‘‘स्पष्टवादी तथा विवेकशील’’ हो गया है और उम्मीद जताई कि महिलाओं के अधिकार सहित वे अपने वादे पूरा करेंगे।

चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर अद्यतन टिप्पणियों में कहा, ‘‘चीन अफगानिस्तान की संप्रभुता और सभी पक्षों की इच्छा के लिए पूर्ण सम्मान के आधार पर अफगान तालिबान और अन्य दलों के साथ संपर्क और संचार बनाए हुए है।’’

हुआ ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन समझा जाता है कि ‘‘अफगान तालिबान इतिहास को नहीं दोहराएगा और अब वे स्पष्टवादी एवं विवेकशील हो गए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वास्तव में देश में तेजी से बदलती स्थितियों में निष्पक्ष निर्णय का अभाव है और अफगानिस्तान में लोगों के विचार ठीक तरीके से नहीं समझे जा रहे हैं खास तौर पर पश्चिमी देशों को इससे सबक लेना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम आशा करते हैं कि अफगान तालिबान अपने सकारात्मक बयानों का पालन कर सकता है, अफगानिस्तान में सभी दलों और जातीय समूहों के साथ एकजुट हो सकता है, एक व्यापक-आधारित, समावेशी राजनीतिक ढांचा स्थापित कर सकता है जो राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल है और जल्द से जल्द बातचीत और परामर्श के माध्यम से सार्वजनिक समर्थन हासिल कर सकता है।’’

उन्होंने यह भी उम्मीद व्यक्त की कि तालिबान उदार और विवेकपूर्ण घरेलू और विदेशी नीतियों को अपनाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह उम्मीद की जाती है कि अफगान तालिबान अफगानिस्तान में स्थिति का एक सुचारू परिवर्तन सुनिश्चित कर सकता है ताकि लंबे समय से पीड़ित अफगानों को युद्ध और अराजकता से जल्द से जल्द निजात दिलाई जा सके और स्थायी शांति का निर्माण किया जा सके।’’

हुआ ने कहा कि इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान में सभी दलों और जातीय समूहों की एकजुटता और सहयोग को प्रोत्साहित और समर्थन करना चाहिए ताकि अफगानिस्तान के इतिहास में एक नया अध्याय बनाया जा सके।

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