ताजा खबरें | उत्तराखंड में सात पनबिजली परियोजनाओं की मंजूरी के लिए न्यायालय में हलफनामा दायर : यादव
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि उत्तराखंड में सात निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाओं को पूरा करने की अनुमति के लिए सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दायर किया है।
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि उत्तराखंड में सात निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाओं को पूरा करने की अनुमति के लिए सरकार ने उच्चतम न्यायालय में एक हलफनामा दायर किया है।
यादव ने उच्च सदन में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अलकनंदा पावर कंपनी बनाम अनुज जोशी और अन्य मामले की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सरकार को गंगा नदी के ऊपरी हिस्सों में पनबिजली परियोजनाओं को लेकर एक साझा नीति रूपरेखा के साथ आने का निर्देश दिया था और उसके बाद हलफनामा दायर किया गया।
उन्होंने कहा, "इसके अनुसार, जल शक्ति मंत्रालय और बिजली मंत्रालय के साथ मशविरा करने के बाद सात परियोजनाओं को लेकर सहमति बनी... 24 अगस्त 2021 को उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक हलफनामा दायर किया गया है।" उन्होंने कहा कि यह मामला न्यायालय में लंबित है और उसके फैसले के बाद आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला किया जाएगा।
यादव ने कहा कि इन सात परियोजनाओं में टिहरी स्टेज-2, तपोवन विष्णुगढ़, विष्णुगढ़ पीपलकोटी, सिंगोली भटवारी और फाटा ब्योंग, मध्यमहेश्वर और कालीगंगा-2 शामिल हैं।
यादव संवेदनशील हिमालयी राज्यों में मेगा पनबिजली परियोजनाओं के लिए लगातार दी जा रही मंजूरी पर नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में कांग्रेस सदस्य आनंद शर्मा के पूरक प्रश्न का जवाब दे रहे थे। मंत्री से यह भी सवाल किया गया था कि क्या सरकार हालिया तपोवन त्रासदी के मद्देनजर मंजूरी के मानदंडों की समीक्षा कर रही है।
पर्वतीय क्षेत्रों में डायनामाइट और विस्फोटकों के अत्यधिक उपयोग के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यादव ने कहा कि इस मामले को देखने के लिए एक सक्षम प्राधिकारी है। निगरानी के उद्देश्य से स्थानीय स्तर पर भी एक समिति है। उन्होंने कहा, "अगर हमें इस संबंध में उल्लंघन का पता चलता है, तो हम कार्रवाई करेंगे।"
निर्माण और संपत्ति में निवेश एवं योजना के समय कार्बन उत्सर्जन पर काबू के लिए सरकार की योजना के संबंध में यादव ने कहा, "हम इस बारे में नया दिशानिर्देश तैयार कर रहे हैं।"
दिल्ली में वायु प्रदूषण के बारे में उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से वाहन प्रदूषण के अलावा औद्योगिक और निर्माण गतिविधियों के कारण है।
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