देश की खबरें | उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं की हड़ताल खत्म, सोमवार से काम पर लौटेंगे वे
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति महेश चन्द्र त्रिपाठी की पीठ ने शनिवार को हापुड़ की घटना पर राज्य विधिज्ञ परिषद के पदाधिकारियों का पक्ष सुनने के बाद छह सदस्यीय न्यायिक समिति का गठन किया जिसके बाद परिषद ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय किया। राज्य विधिज्ञ परिषद ने यहां एक बयान बताया कि उसके अध्यक्ष शिव किशोर गौड़, सदस्य सचिव जय नारायण पांडेय और सदस्य मधुसुदन त्रिपाठी का पक्ष सुनने के लिए शनिवार को मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति महेश चन्द्र त्रिपाठी की पीठ गठित की गयी थी।
प्रयागराज (उप्र), नौ सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति महेश चन्द्र त्रिपाठी की पीठ ने शनिवार को हापुड़ की घटना पर राज्य विधिज्ञ परिषद के पदाधिकारियों का पक्ष सुनने के बाद छह सदस्यीय न्यायिक समिति का गठन किया जिसके बाद परिषद ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय किया। राज्य विधिज्ञ परिषद ने यहां एक बयान बताया कि उसके अध्यक्ष शिव किशोर गौड़, सदस्य सचिव जय नारायण पांडेय और सदस्य मधुसुदन त्रिपाठी का पक्ष सुनने के लिए शनिवार को मुख्य न्यायाधीश प्रितिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति महेश चन्द्र त्रिपाठी की पीठ गठित की गयी थी।
परिषद ने शनिवार को उक्त पीठ के समक्ष प्रदेश के अधिवक्ताओं की ओर से हापुड़ घटना पर अपना पक्ष रखा जिस पर पीठ ने न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। उस समिति में न्यायमूर्ति राजन राय, न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान, महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश या उनके द्वारा नामजद व्यक्ति, राज्य विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष भी शामिल होंगे।
बयान के मुताबिक, उच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति संपूर्ण प्रकरण पर पीड़ित अधिवक्ताओं की समस्त शिकायतों का निवारण करने के लिए सक्षम होगी। राज्य विधिज्ञ परिषद अधिवक्ताओं की मातृ संस्था है, ऐसे में हापुड़ घटना के उपरांत अधिवक्ताओं में व्याप्त रोष को देखते हुए हड़ताल के आह्वान से न्यायिक कार्य बाधित है।
पीठ ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी को इस घटना की जांच करने और अधिवक्ताओं द्वारा दर्ज कराई गयी प्राथमिकी के संबंध में की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया।
शनिवार को अधिवक्ताओं का पक्ष सुनने के बाद पीठ ने कहा, “आपका क्रोध वाजिब है, लेकिन अधिवक्ताओं के कार्य न करने से पूरे प्रदेश में करोड़ों वादकारी प्रभावित हो रहे हैं और न्यायालय में कार्य का बोझ बढ़ता जा रहा है।”
बयान के अनुसार ऐसी स्थिति में राज्य विधिज्ञ परिषद के सभी सदस्यों ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय स्थगित किया है। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा अधिवक्ताओं की मांग पूरी न किए जाने पर पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
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