जरुरी जानकारी | देश में यूरिया का पर्याप्त स्टॉक; दिसंबर तक आयात की जरूरत नहीं: मांडविया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत के पास खरीफ के साथ साथ रबी सत्र की उर्वरक की जरूरत को पूरा करने के लिए यूरिया का पर्याप्त स्टॉक है और दिसंबर तक इसका आयात करने की जरूरत नहीं होगी।

नई दिल्ली, छह जून रसायन और उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत के पास खरीफ के साथ साथ रबी सत्र की उर्वरक की जरूरत को पूरा करने के लिए यूरिया का पर्याप्त स्टॉक है और दिसंबर तक इसका आयात करने की जरूरत नहीं होगी।

मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में गिरावट आई है और उम्मीद है कि अगले छह माह में इसके दाम और नीचे आएंगे।

मांडविया ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘देश में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है। हमारे पास दिसंबर तक घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरिया का भंडार है। हमें दिसंबर तक आयात करने की जरूरत नहीं है।’’

मंत्री ने कहा कि सरकार पहले ही 16 लाख टन यूरिया का आयात कर चुकी है, जिसे अगले 45 दिनों में भेज दिया जाएगा।

डी-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) के मामले में मांडविया ने कहा कि घरेलू उत्पादन के साथ-साथ दीर्घकालिक आयात व्यवस्था दिसंबर तक स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगी।

मंत्री ने कहा कि सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए उचित दरों पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को सब्सिडी में वृद्धि की है।

खरीफ (गर्मी की बुवाई) का मौसम पहले ही शुरू हो चुका है जबकि रबी फसलों की बुवाई अक्टूबर में शुरू होती है।

उर्वरक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्य सरकारों के पास फिलहाल 70 लाख टन यूरिया का भंडार है, जबकि 16 लाख टन यूरिया का आयात किया जा रहा है और दिसंबर तक 175 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया जाएगा।

इसके अलावा अधिकारी ने कहा कि बरौनी और सिंदरी में दो नए संयंत्रों से छह लाख टन यूरिया उपलब्ध होगा, जो अक्टूबर में चालू हो जाएगा और अन्य 20 लाख टन पारंपरिक यूरिया की खपत को तरल नैनो यूरिया से बदल दिया जाएगा।

अधिकारी ने कहा कि जून और दिसंबर के दौरान यूरिया की कुल उपलब्धता 287 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि मांग 210 लाख टन रहने का अनुमान है।

अधिकारी ने कहा कि भारत का यूरिया आयात पिछले वित्त वर्ष में घटकर 77 लाख टन रह गया, जो 2020-21 में 98 लाख टन था। अधिकारी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में आयात लगभग 60 लाख टन तक कम हो सकता है।

चालू वित्त वर्ष में अबतक करीब 15 लाख टन यूरिया का आयात किया जा चुका है और अगले डेढ़ महीने में 16 लाख टन और यूरिया का आयात किया जाएगा।

सरकार ने जॉर्डन के साथ दीर्घकालिक समझौता भी किया है।

उर्वरक सब्सिडी के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा कि यह करीब 2.25 लाख करोड़ रुपये होगी।

वित्त वर्ष 2021-22 में कुल उर्वरक सब्सिडी 1,62,132 करोड़ रुपये रही जबकि वर्ष 2013-14 में यह 71,280 करोड़ रुपये थी।

फिलहाल 45 किलो का यूरिया बैग 266 रुपये की अत्यधिक सब्सिडी वाली कीमत पर उपलब्ध है, जबकि डीएपी के 50 किलो का बैग 1,350 रुपये में बेचा जाता है।

सरकार उर्वरक विनिर्माताओं एवं आयातकों के माध्यम से किसानों को रियायती कीमतों पर यूरिया और पीएंडके उर्वरक के 25 ग्रेड उपलब्ध करा रही है।

अप्रैल 2010 में लागू की गई पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना के तहत सरकार द्वारा सालाना आधार पर नाइट्रोजन (एन), फॉस्फेट (पी), पोटाश (के) और गंधक (सल्फर) जैसे पोषक तत्वों के लिए सब्सिडी की एक निश्चित दर (प्रति किलो आधार पर) की घोषणा की जाती है।

यूरिया के मामले में केंद्र अधिकतम खुदरा मूल्य तय करता है और सब्सिडी के रूप में अधिकतम खुदरा मूल्य और उत्पादन लागत के बीच के अंतर की प्रतिपूर्ति करता है।

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