देश की खबरें | वक्फ विधेयक पर मतदान को लेकर भ्रम फैलाने के लिए सांसद सस्मित पात्रा पर कार्रवाई की जाए: बीजद नेता

भुवनेश्वर, पांच अप्रैल बीजू जनता दल (बीजद) के वरिष्ठ नेताओं के एक वर्ग ने राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर मतदान से पहले सांसदों के बीच ‘‘भ्रम पैदा करने’’ के लिए राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता सस्मित पात्रा के खिलाफ शनिवार को कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पात्रा राज्यसभा में बीजद के नेता भी हैं। वह इस खुलासे के बाद विवादों में घिर गए कि उन्होंने विधेयक के पक्ष में मतदान किया था।

बीजद ने विधेयक का विरोध करने की घोषणा की थी और यहां तक ​​कि पार्टी सांसद मुजीबुल्ला खान ने तीन अप्रैल को संसद के ऊपरी सदन में इसके खिलाफ अपनी बात रखी थी।

लेकिन पात्रा ने मतदान से पहले ‘एक्स’ पर पोस्ट डाली कि पार्टी सांसद ‘अपनी अंतरात्मा के अनुसार’ मतदान कर सकते हैं और उन्हें कोई व्हिप जारी नहीं किया गया है।

इससे बीजद सांसदों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई और कई वरिष्ठ नेताओं ने सवाल उठाए कि क्या पात्रा पार्टी अध्यक्ष और संसदीय दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक के फैसले को बदल सकते हैं।

राज्यसभा सदस्य देबाशीष सामंतराय ने कहा, ‘‘मैंने भ्रम के कारण मतदान से परहेज किया... पार्टी ने पहले ही विधेयक का विरोध करने का निर्णय ले लिया था और अंतिम समय में हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करने के लिए कहा गया।’’ हालांकि, उन्होंने इसके लिए पात्रा को जिम्मेदार नहीं ठहराया।

सामंतराय ने पटनायक के एक करीबी सहयोगी की ओर इशारा करते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘‘सस्मित पात्रा यहां खलनायक नहीं हैं। वह निर्णय नहीं लेते, वह केवल निर्देशों का पालन करते हैं। असली शक्ति कहीं और है, ‘मुख्य सलाहकार’ के पास।’’

उन्होंने ‘मुख्य सलाहकार’ का नाम बताने से इनकार कर दिया और कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि वह कौन है’’।

बीजद सांसद ने ‘मुख्य सलाहकार’ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच ‘बड़ी डील’ का भी संकेत दिया।

सामंतराय ने कहा, ‘‘यह एक बड़ी डील है। मुख्य सलाहकार ने भाजपा के साथ किसी तरह का करार किया है। हाल ही में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने वाला एक नौकरशाह इस डील का हिस्सा हो सकता है। आप सभी जानते हैं कि हाल ही में किसने वीआरएस लिया है। मैं इसे आपकी समझ पर छोड़ता हूं।’’

भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की ओडिशा कैडर की अधिकारी सुजाता आर कार्तिकेयन ने हाल में वीआरएस लिया है। वह बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक के पूर्व करीबी सहयोगी वी के पांडियन की पत्नी हैं।

कम से कम दो वरिष्ठ बीजद नेताओं - प्रफुल्ल सामल और प्रताप जेना - ने पटनायक को पत्र लिखकर पात्रा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पात्रा ने ‘‘वक्फ विधेयक के समर्थन में मतदान करके पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर’’ काम किया है।

इसके अलावा, मुस्लिम बहुल केंद्रपाड़ा विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक गणेश्वर बेहरा ने भी पात्रा की आलोचना करते हुए सवाल किया, ‘‘उनको पार्टी अध्यक्ष के फैसले को बदलने का अधिकार किसने दिया?’’

बेहरा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘उन्होंने गलती की है जिसके लिए उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। संसदीय दल के निर्णय को बदलने का अधिकार केवल बीजद अध्यक्ष को है, किसी और को नहीं।’’ उन्होंने कहा कि यह घोर अनुशासनहीनता है।

सामल और जेना दोनों ने पटनायक को लिखे अपने पत्रों में कहा कि बीजद मुसलमानों सहित अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए संघर्ष जारी रखे हुए है।

सामल ने कहा, ‘‘हालांकि, अल्पसंख्यक समुदायों का विश्वास जीतने के बजाय पात्रा की इस तरह की कार्रवाई से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा है। इसलिए, मैं आपसे उचित कार्रवाई करने का आग्रह करता हूं।’’

वरिष्ठ बीजद नेता और पूर्व मंत्री प्रताप जेना ने पात्रा की कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की और इस कदम को ‘पार्टी विरोधी’ और ‘ हतप्रभ करने वाला’ करार दिया।

बीजद विधायक और पूर्व मंत्री बद्री नारायण पात्रा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘यह स्थिति जानबूझ कर की गई शरारत का नतीजा है। सस्मित पात्रा ने बीजद अध्यक्ष के फैसले की अवहेलना करने और अपने स्वयं के मंच पर अपना रुख बदलने की घोषणा करने का साहस कैसे किया? उन्होंने पूरी पार्टी को असमंजस में डाल दिया है और इस पर कार्रवाई की जरूरत है।’’

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