टीका विकसित करने के काम में तेजी लाएं दक्षिण-पूर्वी एशिया के स्वास्थ्य नियामक, निर्माता: डब्ल्यूएचओ

डब्ल्यूएचओ ने क्षेत्र के टीका निर्माताओं और राष्ट्रीय नियामक प्राधिकारियों से बुधवार को वीडियो लिंक के जरिए बैठक की और ‘सार्स-सीओवी-2’ टीके को जल्द विकसित करने के लिए समय-सीमा, उत्पादन क्षमता एवं आवश्यक प्रक्रियागत व्यवस्थाओं पर बातचीत की।

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नयी दिल्ली, 29 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना वायरस संकट के दौरान सहयोग एवं नवोन्मेष की महत्ता पर बल देते हुए दक्षिण-पूर्वी एशिया क्षेत्र में टीका निर्माताओं और राष्ट्रीय नियामक प्राधिकारियों से बुधवार को अपील की कि वे कोविड-19 के टीके को विकसित करने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।

डब्ल्यूएचओ ने क्षेत्र के टीका निर्माताओं और राष्ट्रीय नियामक प्राधिकारियों से बुधवार को वीडियो लिंक के जरिए बैठक की और ‘सार्स-सीओवी-2’ टीके को जल्द विकसित करने के लिए समय-सीमा, उत्पादन क्षमता एवं आवश्यक प्रक्रियागत व्यवस्थाओं पर बातचीत की।

डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में बताया कि इस वर्चुअल बैठक में भारत, इंडोनेशिया एवं थाईलैंड के निर्माताओं ने समय-सीमा एवं उत्पादन क्षमता पर बात की और नियामक निकायों ने कोविड-19 टीके को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने के लिए प्रक्रिया में आवश्यक समायोजनों के बारे में बात की।

डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्वी एशिया की क्षेत्रीय निदेशक पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि टीका बनाने वालों के मामले में यह क्षेत्र अग्रणी है और अब उसे मौजूदा वैश्विक महामारी से निपटने में भी अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

कोविड-19 टीके को बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने से पहले कई कदम उठाने आवश्यक हैं। इनमें क्लीनिकल ट्रायल से पहले का अध्ययन, क्लीनिकल ट्रायल, निर्माण, लाइसेंस संबंधी कार्य, टीके की उपलब्धता और विपणन के बाद निगरानी संबंधी योजनाएं शामिल हैं।

सिंह ने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि कोविड-19 का सुरक्षित एवं प्रभावी टीका विकसित होने के बाद पूरी मानवता को यह उपलब्ध हो। इसके लिए हम विशेषज्ञों के विचार-विमर्श समन्वित कर रहे हैं, लक्षित उत्पाद प्रोफाइल (टीपीपी) विकसित कर रहे हैं और क्लीनिकल ट्रायल में समर्थन मुहैया करा रहे हैं। डब्ल्यएचओ पूरे क्षेत्र और पूरी दुनिया में आपके प्रयासों में मदद करने और उन्हें समन्वित करने को लेकर प्रतिबद्ध है।’’

डब्ल्यूएचओ ने बयान में कहा कि भारत, इंडोनेशिया और थाईलैंड विश्व में सबसे बड़े टीका निर्माताओं में शामिल हैं। इन तीनों देशों में हर रोज सभी आयु वर्गों के लाखों लोगों के लिए जीवन रक्षक टीके बनाए जाते हैं।

डबल्यूएचओ ने बताया कि 120 से अधिक संभावित टीका उम्मीदवारों को विश्वस्तर पर प्रस्तावित किया गया है और डब्ल्यूएचओ उनके प्रकार एवं प्रगति पर नजर रख रही हैं। सात उम्मीदवार क्लीनिकल मूल्यांकन के चरण में हैं और 80 उम्मीदवार इससे पहले के चरण में हैं।

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