नयी दिल्ली, तीन अगस्त आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ को मणिपुर मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा के स्थान पर एक प्रस्ताव के तहत नियम 168 के अंतर्गत चर्चा कराये जाने का अनुरोध किया।
आप सदस्य का यह अनुरोध उच्च सदन में मणिपुर पर चर्चा कराये जाने को लेकर जारी गतिरोध के बीच आया है। विपक्ष के सदस्य इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान और कार्यस्थगन के प्रावधान वाले नियम 267 के तहत चर्चा कराये जाने की मांग पर अड़े हुए हैं।
चड्ढा मणिपुर पर नियम 168 के तहत चर्चा कराये जाने का नोटिस पहले ही दे चुके हैं जिसमें उनके द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के तहत चर्चा करवायी जाए।
सभापति धनखड़ ने इस मुद्दे पर नियम 176 के तहत चर्चा कराये जाने को अनुमति दे दी है। सरकार की ओर से उच्च सदन के नेता पीयूष गोयल ने भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सहमति व्यक्त की। सभापति ने आज सदन में यह भी स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर अल्पकालिक चर्चा के लिए समय की ढाई घंटे वाली सीमा नहीं होगी।
चड्ढा ने अपने नोटिस में कहा, ‘‘राज्यसभा की प्रक्रियाओं एवं आचरण के नियमों में नियम 168 के तहत राज्यसभा के वर्तमान सत्र में आम जनता के हित से जुड़ा निम्न प्रस्ताव पेश करने का नोटिस देना चाहता हूं।’’
आप सदस्य ने इसमें कहा, ‘‘यह सदन मई 2023 से मणिपुर राज्य में जारी हिंसा पर अपनी गहरे क्षोभ की भावना प्रकट करता है जिसमें अनुच्छेद 355 के तहत आंतरिक गड़बड़ी होने पर राज्यों का संरक्षण प्रदान करने में केंद्र सरकार द्वारा उसका संवैधानिक दायित्व निभाने में विफल रहने के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गयी, करोड़ों रूपये की संपत्ति नष्ट हो गयी, हजारों नागरिक बेघर हो गये तथा महिलाओं के खिलाफ घृणित अपराध की घटनाएं घटित हुईं।’’
उच्च सदन में जारी गतिरोध को दूर करने के लिए आज सदन के नेता पीयूष गोयल एवं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं अन्य विपक्षी नेताओं से मुलाकात की। किंतु करीब आधा घंटे तक चली इस बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका।
सूत्रों के अनुसार राज्यसभा में विपक्ष अपने इस रुख पर कायम है कि प्रधानमंत्री मोदी को दोनों सदनों में मणिपुर मुद्दे पर बयान देना चाहिए। हालांकि विपक्ष नियम 267 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा कराने की अपनी मांग पर कुछ नरम पड़ सकता है।
सूत्रों ने कहा कि बैठक में विपक्ष के नेताओं को नियम 168 के तहत चर्चा कराने का भी सुझाव दिया गया।
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