देश की खबरें | जनहित में पट्टे पर दिए जाते हैं एएआई के हवाईअड्डे : सिंह
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने सोमवार को संसद में कहा कि सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) के हवाई अड्डों को उनके बेहतर प्रबंधन के लिए जनहित में पट्टे पर दिया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पट्टे से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल भी हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाता है।
नयी दिल्ली, 19 दिसंबर केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने सोमवार को संसद में कहा कि सरकारी स्वामित्व वाले भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) के हवाई अड्डों को उनके बेहतर प्रबंधन के लिए जनहित में पट्टे पर दिया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पट्टे से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल भी हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए किया जाता है।
मौजूदा समय में, 13 हवाई अड्डे हैं जो सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड के तहत संचालित किए जा रहे हैं। उनमें से आठ हवाई अड्डे एएआई के हैं और शेष पांच संबंधित राज्य सरकारों के हैं।
नागर विमानन राज्यमंत्री सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया, "हवाई अड्डों पर पीपीपी का कार्यान्वयन, सफलता की कहानी पेश करता है ... हवाई अड्डों पर पीपीपी ने एएआई को अपना राजस्व बढ़ाने और टियर- 2 और टियर- 3 शहरों में हवाई अड्डों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने में मदद की है।"
सिंह ने कहा कि एएआई के हवाई अड्डों को निजी क्षेत्र की दक्षता और निवेश का उपयोग करते हुए उनके बेहतर प्रबंधन के लिए जनहित में पट्टे पर दिया जाता है।
मंत्री ने कहा कि देश में अभी 146 हवाई अड्डों पर परिचालन हो रहा है जबकि 2014 में ऐसी हवाई अड्डों की संख्या 74 थी।
पीपीपी के तहत आने वाले हवाई अड्डे- दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, अहमदाबाद, मंगलुरु, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम, हैदराबाद, बेंगलुरु, कोचीन, कन्नूर और दुर्गापुर हैं।
मंत्री द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में, दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों को क्रमशः 317.41 करोड़ रुपये और 331.64 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) के अनुसार, एएआई के 25 हवाई अड्डों को वर्ष 2022-25 की अवधि के लिए पट्टे पर देना तय किया गया है।
सिंह ने कहा, ‘‘हवाई अड्डों के निर्माण और उन्नयन के लिए, एएआई ने 2017-18 में 2,504.38 करोड़ रुपये, 2018-19 में 4,297.44 करोड़ रुपये, 2019-20 में 4,713.49 करोड़ रुपये, 2020-21 में 4,350 करोड़ रुपये और 2021-22 में 3,724.34 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया है।“
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