विदेश की खबरें | इजराइल के हवाई हमले में महज 17 दिन पहले पैदा हुई फलस्तीनी नवजात और उसके भाई की मौत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. फलस्तीन में इजराइली सैन्य बलों की लगातार बमबारी के बीच, 17 दिन पहले इस बच्ची का जन्म जिस अस्पताल में हुआ, वहां बिजली भी नहीं थी।
फलस्तीन में इजराइली सैन्य बलों की लगातार बमबारी के बीच, 17 दिन पहले इस बच्ची का जन्म जिस अस्पताल में हुआ, वहां बिजली भी नहीं थी।
नवजात का नाम उसके परिवार ने बड़े उत्साह से अल-अमीरा आयशा रखा था जिसका अर्थ होता है ‘राजकुमारी आयशा’। लेकिन मंगलवार को इजराइली हवाई हमले में उसकी मौत हो गई। हमले में नवजात का घर पूरी तरह से नष्ट हो गया और उसका भाई भी मारा गया।
नवजात की दादी और हमले जीवित बची सुजैन जोराब ने बताया कि मंगलवार को सुबह होने से पहले रफाह में जब उनके अपार्टमेंट पर हमला हुआ तब उनका पूरा परिवार सो रहा था।
अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि हमले में 27 लोग मारे गए जिसमें आयशा और उसका दो साल का भाई अहमद भी शामिल हैं।
अस्पताल में अपने घायल बेटे के बिस्तर के किनारे बैठी सुजैन ने कांपती आवाज में कहा, ''वह सिर्फ दो सप्ताह की थी। उसका नाम भी पंजीकृत नहीं हुआ था।''
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गाजा में हुए हमले में पीड़ित परिवार पर यह विपदा उस वक्त आई जब फलस्तीन में मरने वाले लोगों की संख्या 20,000 के करीब पहुंच गई है। अधिकतर लोग इजराइली हवाई हमलों में मारे गए हैं।
चरमपंथी संगठन हमास और अन्य समूहों के उग्रवादियों द्वारा सात अक्टूबर को इजराइल पर हमले करने के बाद यह युद्ध शुरू हुआ था। उग्रवादियों ने दक्षिणी इजराइल में घुसकर करीब 1,200 लोगों की हत्या कर दी थी और 240 अन्य लोगों का अपहरण कर लिया था। पीड़ितों में अधिकतर इजराइली नागरिक थे।
सुजैन का परिवार गाजा में उन कुछ फलस्तीनियों में से था जो अपने घर पर ही रह रहे थे। यह परिवार तीन मंजिला अपार्टमेंट में रह रहा था लेकिन हमले के डर से सब भूतल पर ही रहते थे। हमले में जोराब के परिवार के कम से कम 13 सदस्य मारे गए जिसमें एक पत्रकार एडेल भी शामिल था। इसके साथ ही आसपास के लोगों की भी जान चली गई।
सुजैन ने कहा, "हमले के बाद पूरा घर हमारे ऊपर ढह गया।" बचावकर्मियों ने उन्हें और अन्य पीड़ितों को मलबे से निकाला जिनमें मृतक भी शामिल थे।
उन्होंने कहा कि राजकुमारी आयशा केवल 17 दिन की थी जिसका जन्म दो दिसंबर को रफाह के अमीराती रेड क्रीसेंट अस्पताल में हुआ था जहां बिजली नहीं थी।
सुजैन ने कहा, "आयशा बहुत कठिन परिस्थिति में पैदा हुई थी।"
हमले में आयशा की मां मलक जल गई है। उसके पिता मोहम्मद की कमर की हड्डी टूट गई है। रफाह के कुवैती अस्पताल के बिस्तर पर पड़े मोहम्मद के पास सुजैन आयशा और अहमद के शव ले कर आईं और दोनों बच्चों का चेहरा आखिरी बार दिखाया।
मलक और मोहम्मद अपने बच्चों के शव देख कर बिलख पड़े। दोनों शवों को दफनाने के लिए भेज कर सुजैन ने कहा ‘‘अपने पोते पोती को मैं नहीं बचा सकी। अपनी आंखों के सामने मैंने उन्हें खो दिया।’’
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