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घर लौटने की आस देख रहे प्रवासियों में बड़ी संख्या महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गो की

ऐसे ही लोगों के बीच रमावती देवी भी हैं जो कड़ी धूप के बीच आनंद विहार बस टर्मिनल के पास मेट्रो के एक खंभे के नीचे बैठी थीं। करीब साठ साल की हो चुकीं देवी अपने दो मासूम पोतों का भी ख्याल रख रही हैं और अपने बेटे तथा गर्भवती पुत्रवधु की प्रतीक्षा कर रही हैं। दोनों अपने गांव लौटने के लिए व्यवस्था करने में जुटे हैं।

घर लौटने की आस देख रहे प्रवासियों में बड़ी संख्या महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गो की
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नयी दिल्ली : गाजियागाद, 16 मई कोरोना वायरस पर काबू के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक बेरोजगार हो गए और ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि कइयों को उनके मकानमालिकों ने भाड़ा नहीं देने के कारण घर से बाहर कर दिया।

ऐसे ही लोगों के बीच रमावती देवी भी हैं जो कड़ी धूप के बीच आनंद विहार बस टर्मिनल के पास मेट्रो के एक खंभे के नीचे बैठी थीं। करीब साठ साल की हो चुकीं देवी अपने दो मासूम पोतों का भी ख्याल रख रही हैं और अपने बेटे तथा गर्भवती पुत्रवधु की प्रतीक्षा कर रही हैं। दोनों अपने गांव लौटने के लिए व्यवस्था करने में जुटे हैं।

देवी सहित कई लोग वहां एकत्र हैं जो सीमा पार कर उत्तर प्रदेश में प्रवेश करना चाहते हैं। कई लोग दूसरे प्रदेशों के भी हैं जो अपने घरों को लौटना चाहते हैं।

उनकी मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं और दिल्ली पुलिस का एक जवान उन्हें वहां से हटाता है। देवी वहां से हटकर एक पेट्रोल पंप के पास खड़ी रहती हैं क्योंकि उन्हें अपने बेटे और पुत्रवधु की भी प्रतीक्षा करनी है।

देवी सहित विभिन्न लोगों की आंखों से बहते आंसू ही उनकी स्थिति स्पष्ट कर देते हैं कि वे कैसे दौर से गुजर रहे हैं।

देवी का परिवार दिल्ली के पीरागढ़ी इलाके में रह रहा था। देवी ने कहा कि उनका बेटा दिहाड़ी मजदूर है जबकि पुत्रवधु दूसरों के घरों में सहायिका का काम करती है। लेकिन लॉकडाउन के कारण दोनों के पास कोई काम नहीं था। दो महीने का किराया नहीं देने पर मकान मालिक ने भी उन्हें घर से निकाल दिया। ऐसे में उनके पास उत्तर प्रदेश में हरदोई के अपने गांव लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।

यह कहानी सिर्फ देवी की नहीं है। करीब दो महीने के लॉकडाउन में ढेरों लोग हैं जिनकी बचत समाप्त हो गयी है। ऐसे में उनके पास ट्रेन टिकट खरीदने के भी पैसे नहीं हैं।

रमा देवी से करीब पचास मीटर की दूरी पर शिवशंकर यादव (27) अपनी पत्नी आरती (25) और दो बेटियों अंशी (तीन) प्रियांशी (दो) हैं। वे मूल रूप से सुल्तानपुर के निवासी हैं।

गर्मी से परेशान यादव ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें खाना मुहैया कराया गया लेकिन बच्चों के लिए दूध के पैसे नहीं हैं। उनके पास जो पैसे थे, वे अब खत्म हो गए हैं।

कई परिवार ऐसे हैं जिनकी कहानी लगभग यही है।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 16, 2020 08:32 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).