नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमिताभ कांत ने बृहस्पतिवार को कहा कि 5जी नेटवर्क के क्रियान्वयन में चीनी कंपनियों को भाग लेने की अनुमति देने के बारे में भारत का अभी अंतिम निर्णय करना बाकी है। उन्होंने यह भी कहा कि 5जी क्रियान्वयन में सुरक्षा प्रमुख चिंता का विषय होगा।
कांत ने डिजिटल तरीके से आयोजित‘ रेज 2020’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च दर से वृद्धि के लिये भारत को 5जी अैर कृत्रिम मेधा (एआई) दोनों को अपनाकर प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर लंबी छलांग लगानी होगी।
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उन्होंने कहा, ‘‘मेरी व्यक्तिगत राय है कि हमें 5जी के लिये आगे बढ़ना चाहिए लेकिन इसमें सुरक्षा बड़ी चिंता का विषय होगा।’’
कांत ने कहा, ‘‘... चीनी कंपनियों समेत सभी प्रमुख कंपनियां भारत में 5जी परीक्षण के लिये मौजूद हैं। उन्हें परीक्षण करने दें। इस बारे में अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।’’
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उन्होंने कहा कि सरकार ने नोकिया और एरिक्सन जैसी 5जी प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के साथ बातचीत की है।
नीति आयोग के सीईओ ने कहा, ‘‘अब रिलयंस इंडस्ट्रीज ने खुले स्रोत आदि से अपनी खुद की 5जी प्रौद्योगिकी विकसित की है... इसीलिए हमारे लिये यह महत्वपूर्ण है कि 5जी का क्रियान्वयन हो और वह आगे बढ़े...।’’
कई देश 5जी सेवाओं के क्रियान्वयन में हुआवेई जैसी चीनी कंपनियों की भागीदारी को लेकर तैयार नहीं हैं। अमेरिका पहले ही सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण हुआवेई पर पाबंदी लगा चुका है। साथ ही अमेरिका दूसरे देशों पर भी इस प्रकार की पाबंदी लगाने के लिये दबाव दे रहा है।
5जी अगली पीढ़ी की सेल्यूलर पौद्योगिकी है। इसमें डाउनलोड की गति 4जी नेटवर्क के मुकाबले 10 से 100 गुना तेज होगी।
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