देश की खबरें | अंडमान की सेल्यूलर जेल में 1909 से 1938 तक 585 क्रांतिकारियों को कैद किया गया : सरकार
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नयी दिल्ली, 13 फरवरी केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को संसद को बताया कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह की सेल्यूलर जेल में 1909 से 1938 के बीच 585 क्रांतिकारियों को कैद किया गया था, जिनमें से 398 अविभाजित बंगाल से थे।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
मालूम हो कि अंग्रेजों के जमाने में काला पानी की सजा दी जाती थी, जिसे मौत से भी बदतर माना जाता था। इतिहासकारों के मुताबिक, ऐसा इसलिए था क्योंकि इसमें व्यक्ति को जिंदा रहते हुए वह सभी कष्ट सहने पड़ते थे, जो मौत से भी ज्यादा दर्दनाक हुआ करते थे।
संस्कृति मंत्री से पूछा गया था कि क्या यह सच है कि अंडमान सेल्यूलर जेल में सजा के लिए भेजे गए कुल स्वतंत्रता सेनानियों में सर्वाधिक संख्या अविभाजित बंगाल के क्रांतिकारियों की थी?
शेखावत ने इसके जवाब में कहा, "जी सर। पोर्ट ब्लेयर स्थित अंडमान और निकोबार प्रशासन के कला और संस्कृति निदेशालय ने कहा है कि 1909-1938 तक सेल्यूलर जेल में 585 क्रांतिकारियों को रखा गया था और उनमें से 398 क्रांतिकारी अविभाजित बंगाल से थे।"
मंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों का राज्यवार विवरण भी साझा किया, जिन्हें औपनिवेशिक शासन के दौरान सेल्यूलर जेल में रखा गया था।
जवाब के मुताबिक, इन 585 क्रांतिकारियों में से 398 पंजाब से, 17 बिहार से, 18 उत्तर प्रदेश से, 14 केरल से और पांच ओडिशा से थे।
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, सेल्यूलर जेल को अंग्रेजों ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को कैद रखने के लिए बनवाया था।
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