देश की खबरें | चुनाव में ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर विरोध के कारण मुंबई में भाजपा के 40 नेता गिरफ्तार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मुंबई पुलिस ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं चंद्रकांत पाटिल, प्रवीण दरेकर और सुधीर मुनगंटीवार सहित लगभग 40 कार्यकर्ताओं को उस वक्त हिरासत में ले लिया, जब वे चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की मांग को लेकर राज्य सचिवालय के पास पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।

मुंबई, 25 मई मुंबई पुलिस ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं चंद्रकांत पाटिल, प्रवीण दरेकर और सुधीर मुनगंटीवार सहित लगभग 40 कार्यकर्ताओं को उस वक्त हिरासत में ले लिया, जब वे चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की मांग को लेकर राज्य सचिवालय के पास पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।

एक अधिकारी ने बताया कि हिरासत में लिये गए भाजपा कार्यकर्ताओं को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान ले जाया गया और बाद में छोड़ दिया गया।

इससे पहले, भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं ने चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षण की मांग को लेकर दक्षिण मुंबई में महाराष्ट्र सचिवालय 'मंत्रालय' के पास पार्टी कार्यालय के बाहर सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि जिस समय प्रदर्शनकारी करीब 250 कार्यकर्ताओं के साथ अपनी मांगों को लेकर मंत्रालय जाने की योजना बना रहे थे, मरीन ड्राइव पुलिस ने हस्तक्षेप किया और उन्हें अपने पुलिस वाहन में ले जाना शुरू किया।

राज्य विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दारेकर, राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल और पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार सहित कम से कम 40 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

अधिकारी ने बताया कि आजाद मैदान ले जाने के बाद उन सभी को छोड़ दिया गया।

उच्चतम न्यायालय ने इस साल की शुरुआत में स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की बहाली की सिफारिश करने वाली महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की अंतरिम रिपोर्ट खारिज कर दी थी।

अदालत ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग से पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों पर कार्रवाई नहीं करने को भी कहा था।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल ओबीसी को स्थानीय निकाय चुनावों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने इस सरकार से पिछड़ेपन की प्रकृति की अनुभवजन्य जांच करने और आवश्यक आरक्षण के अनुपात को निर्दिष्ट करने के लिए एक आयोग के गठन को कहा था।

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