अहमदाबाद, 11 फरवरी विशेष सीबीआई अदालत ने धोखाधड़ी के दो दशक पुराने एक मामले में बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मुख्य प्रबंधक को तीन साल कैद और डेढ़ लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
जे. श्रीनिवास राव पर बैंक को गलत तरीके से 80 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि उन्होंने कथित तौर पर एक लाभार्थी को जाली और फर्जी संपार्श्विक सुरक्षा के आधार पर 30 लाख रुपये की कार्यशील पूंजी, 25 लाख रुपये का ऋण पत्र और 25 लाख रुपये का सावधि ऋण प्राप्त करने में मदद की थी।
सीबीआई ने 30 अक्टूबर 2003 को राव और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, ऋण प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों को असली के रूप में उपयोग करने, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र, साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आपराधिक कदाचार के अपराध के लिए मामला दर्ज किया।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 23 दिसंबर 2005 को आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया।
सीबीआई ने मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि अहमदाबाद में बैंक ऑफ इंडिया की एसएम रोड शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक राव को दोषी पाया गया है।
विज्ञप्ति में कहा गया कि अदालत ने सोमवार को राव को तीन साल की कैद और 1.5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी जमानत राशि जमा कराई, एक मशीनरी आपूर्तिकर्ता के नाम पर खाता खोला और मशीनरी की खरीद के लिए बैंक से जारी चेक उसमें जमा करा दिया।
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