नयी दिल्ली, दो सितंबर दिल्ली में अगले सप्ताह भारत मंडपम में जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा जहां पर भगवान शिव के ‘नटराज’ स्वरूप की विशाल प्रतिमा स्थापित की जा रही है। माना जा रहा है कि ‘नटराज’ की यह दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमा होगी।
सूत्रों ने बताया कि यह प्रतिमा आधार सहित 28 फुट ऊंची है और धातु ढलाई की प्राचीन ‘मोम’ तकनीक का उपयोग करके इसे बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रतिमा का निर्माण करने में प्रसिद्ध चोल कांस्य का उपयोग किया गया है।
‘नटराज’ भगवान शंकर का स्वरूप है जिसमें वह ब्रह्मांड का सृजन करने और विध्वंस करने की उनकी शक्ति को ‘तांडव’मुद्रा में दिखाया गया है।
सूत्रों ने बताया, ‘‘ हम जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन स्थल भारत मंडपम के परिसर में नटराज की अब तक की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं।’’
जी20 नेताओं का शिखर सम्मेलन 9-10 सितंबर को प्रगति मैदान में नवनिर्मित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी केंद्र ‘भारत मंडपम’ में होगा।
शिखर सम्मेलन के पहले दिन, संस्कृति मंत्रालय की परिकल्पना से तैयार ‘सांस्कृतिक गलियारे’ का भी भारत मंडपम में अनावरण किया जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ‘सांस्कृतिक गलियारे’ की अवधारणा सभी 29 देशों से ‘सर्वश्रेष्ठ और सबसे मूल्यवान कलाकृतियों को एक ही स्थान पर लाने’ से जुड़ी है, जो जी-20 के विषय वसुधैव कुटुंबकम की सार होगी।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा गलियारा यह भी दर्शाएगा कि ‘संस्कृति सभी को जोड़ती है।’’
अधिकारी के मुताबिक ‘संस्कृति सभी को एकजुट करती है’ भारत की अध्यक्षता में जी20 के संस्कृति कार्य समूह का उप-विषय था।
सूत्रों के मुताबिक ‘सांस्कृतिक गलियारा - जी20 डिजिटल संग्रहालय’के हिस्से के रूप में, सभी जी20 सदस्यों और आमंत्रित देशों से प्राप्त भौतिक और डिजिटल प्रारूपों में कलाकृतियों को उसी मंजिल पर प्रदर्शित किया जाएगा जहां नेताओं की बैठकें होंगी और इस गलियारे से होकर गुजरेंगे। उन्होंने बताया कि विश्व नेता शिखर कक्ष में जाते और बाहर निकलते समय ‘सांस्कृतिक गलियारा’को निहारेंगे।
उन्होंने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय परियोजना के लिए अमूर्त विरासत श्रेणी में भारत की ओर से - योग, कुंभ मेला, वैदिक मंत्रोच्चार, कांस्य ढलाई की खोई-मोम परंपरा और गुजरात के डबल इक्कत बुनाई पाटन पटोला को शामिल किया गया है।
सूत्रों ने बताया कि ‘सांस्कृतिक गलियारे ’ के तहत भौतिक और डिजिटल कलाकृतियों की प्रदर्शनी शिखर सम्मेलन कक्ष से लगे हॉलवे में 10,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैली होगी, जिसमें विशाल स्क्रीन लगे होंगे।
भारत से ऋग्वेद की पांडुलिपियां, ब्रिटेन से मैग्ना कार्टा की एक दुर्लभ प्रति और फ्रांस से मोनालिसा की एक एनामॉर्फिक डिजिटल छवि, अमेरिका से आजादी के घोषाणपत्र की सत्यापित मूल प्रतियां, चीन से एक फहुआ ढक्कन वाला जार ‘सांस्कृतिक गलियारे’ में प्रदर्शित की जाने वाली कलाकृतियों में शामिल होंगी।
अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ के रूप में प्रस्तुत करने वाली एक प्रदर्शनी भी लगा रहा है, जो ‘हमारे 5,000 से अधिक वर्षों के इतिहास की जानकारी देगी और बताएगी कि कैसे हमने इन वर्षों में अपने लोकतांत्रिक परंपराओं को बनाए रखा और मजबूत किया है।’’
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