देश की खबरें | इलाज के लिए म्यांमा से भारत लाए गए 24 मरीज
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गंभीर बीमारियों से पीड़ित एवं अंग प्रतिरोपण तथा विशेष चिकित्सा उपचार की छह महीने से अधिक समय से प्रतीक्षा कर रहे 24 मरीजों के एक समूह को म्यांमा से इलाज के लिए दिल्ली के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में लाया गया है। इन लोगों को कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति की वजह से उचित उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही थी।
नयी दिल्ली, आठ जुलाई गंभीर बीमारियों से पीड़ित एवं अंग प्रतिरोपण तथा विशेष चिकित्सा उपचार की छह महीने से अधिक समय से प्रतीक्षा कर रहे 24 मरीजों के एक समूह को म्यांमा से इलाज के लिए दिल्ली के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में लाया गया है। इन लोगों को कोविड-19 से उत्पन्न स्थिति की वजह से उचित उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही थी।
अस्पताल के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
चिकित्सकों के मुताबिक इलाज के लिए दिल्ली लाए गए मरीज लिवर अथवा गुर्दे की बीमारी से लेकर हेपेटाइटिस बी वायरस संक्रमण से भी पीड़ित हैं।
अपोलो अस्पताल के एक प्रवक्ता ने कहा, "कोविड-19 संबंधी लॉकडाउन के बीच अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए प्रतिबंधों में ढील दिए जाने के बाद मरीजों के समूह को एक विशेष चार्टर्ड विमान के जरिए दो जुलाई को दिल्ली लाया गया।"
चिकित्सकों के मुताबिक विदेश से कई मरीज समय-समय पर चिकित्सा संबंधी सलाह और इलाज के लिए दिल्ली आते हैं लेकिन कोविड-19 की दूसरी लहर के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रोक लगा दी गई थी, इसलिए ये मरीज नहीं आ सके थे।
अस्पताल के प्रवक्ता ने बताया कि म्यांमा से इलाज के लिए आए 24 मरीजों को फिलहाल 12 दिन के लिए पृथक-वास में रखा गया है। इसके बाद अंग प्रतिरोपण को लेकर उनकी स्थिति की समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद यह फैसला लिया जाएगा कि किस मरीज को अंग प्रतिरोपण की आवश्यकता है और किसके लिए विशेष चिकित्सा इलाज ही पर्याप्त होगा।
अपोलो अस्पताल के समूह चिकित्सा निदेशक डॉक्टर अनुपम सिब्बल ने कहा, "ये मरीज लिवर, गुर्दे और हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं और पिछले करीब छह महीने से अधिक समय से अंग प्रतिरोपण तथा विशेष चिकित्सा उपचार की प्रतीक्षा कर रहे थे। अंतरराष्ट्रीय यात्रा में छूट दिए जाने के अलावा दोनों देशों के दूतावासों के बीच सहयोग से इन्हें भारत में इलाज के लिए हमारे अस्पताल में लाया गया है।"
चिकित्सकों का कहना है कि सभी मरीजों की हालत बेहद गंभीर है और यदि इन्हें इलाज मिलने में किसी भी प्रकार की देरी हुई तो यह उनके लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है।
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