देश की खबरें | 2020 दंगे: पुलिस ने कहा, आरोपियों के भाषणों का सार मुसलमानों में डर की भावना पैदा करना था

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली पुलिस ने सोमवार को उच्च न्यायालय से कहा कि शहर के उत्तर पूर्वी हिस्से में फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों की कथित साजिश रचने के मामले में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आरोपित विभिन्न लोगों की ओर से दिए गए भाषणों में एक बात आम थी कि “उनका सार मुस्लिम आबादी में भय की भावना पैदा करना था।”

नयी दिल्ली, एक अगस्त दिल्ली पुलिस ने सोमवार को उच्च न्यायालय से कहा कि शहर के उत्तर पूर्वी हिस्से में फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों की कथित साजिश रचने के मामले में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आरोपित विभिन्न लोगों की ओर से दिए गए भाषणों में एक बात आम थी कि “उनका सार मुस्लिम आबादी में भय की भावना पैदा करना था।”

यूएपीए के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार आरोपियों में शामिल जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद की ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन ने कहा कि फरवरी 2020 में खालिद ने अमरावती में जो भाषण दिया था वह “ बहुत नपा तुला भाषण’ था जिसमें बाबरी मस्जिद, एक बार में तीन तलाक देना, कश्मीर, मुसलमानों का दमन, संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) समेत विभिन्न बिंदु शामिल थे।

यह दलीलें न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ के समक्ष दी गई हैं। यह पीठ खालिद की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें निचली अदालत के 24 मार्च के आदेश को चुनौती दी गई है। निचली अदालत ने खालिद की ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया था।

खालिद के वकील ने कहा था कि उसके भाषण में कुछ भी गलत नहीं है। इसके बाद विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने कहा, “ मैं भी यह कहता हूं कि कुछ गलत नहीं हैं। यह बहुत नपा-तुला भाषण था। इसमें विभिन्न बिंदु थे। एक-बाबरी मस्जिद, दो- तीन तलाक, तीन- कश्मीर, चार-मुलमानों का दमन और पांच- सीएए और एनआरसी।”

उन्होंने कहा कि विभिन्न आरोपियों की ओर से दिए गए भाषणों में एक आम बात थी जो पूरे भाषण में थी और यह “ उनका सार मुस्लिम आबादी में भय की भावना पैदा करना था।”

उन्होंने आरोपी शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद के भाषणों को पढ़ा और कहा, “जब आप बाबरी मस्जिद या तीन तालक की बात करते हैं, तो वे एक धर्म से संबंधित होते हैं। लेकिन जब आप कश्मीर की बात करते हैं तो यह धर्म का मुद्दा नहीं है, यह राष्ट्रीय एकता का मुद्दा है।”

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए प्रसाद ने दलील दी कि ये आरोपी 2020 में दंगा करने की साजिश के तहत प्रासंगिक समय पर एक-दूसरे से जुड़े थे।

अभियोजक ने कहा कि मामला छह मार्च 2020 को दर्ज किया गया था और पहली गिरफ्तारी आठ मार्च 2020 को की गई थी। जिस क्षण गिरफ्तारी सार्वजनिक हुई उसके बाद पूरे व्हाट्सएप समूह को डिलीट कर दिया गया जिस पर लोग बातचीत करते थे और इसमें शामिल लोग 'सिग्नल' नामक एक अन्य एप्लिकेशन का इस्तेमाल करने लगे।

प्रसाद ने कहा कि दंगे दो चरणों में हुए, पहले 2019 में और फिर फरवरी 2020 में। उन्होंने दावा किया कि दंगों के दौरान गलत सूचना फैलाई गई, सड़कों को अवरुद्ध किया गया, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों पर हमला किया गया, गैर-मुस्लिम क्षेत्रों में हिंसा की गई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल बम और हिंसा के अन्य साधनों का इस्तेमाल किया गया।

सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति मृदुल ने कहा कि पेश सामग्री पर गौर लिया जा रहा है जिसमें विभिन्न आरोपियों पर लगाए गए आरोपों और उनकी भूमिका निश्चित रूप से आपस में जुड़ी हुई लगती है।

न्यायमूर्ति मृदुल ने कहा, “ ऐसा लगता है कि हम उन सभी के संबंध में अभियोजन को सुन रहे हैं। बेशक, एक व्यक्ति विभिन्न अपराधों में आरोपी है लेकिन निश्चित रूप से आपस में जुड़ाव है।”

उन्होंने पक्षों के वकील से यह तय कर अदालत को सूचित करने के लिए कहा कि क्या अन्य आरोपियों की लंबित अपीलों पर अलग-अलग सुनवाई की जानी चााहिए या एक साथ।

अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई मंगलवार के लिए सूचीबद्ध कर दी।

इससे पहले खालिद के वकील ने कहा था, ‘‘ जब तक आपने कुछ अवैध नहीं किया हो तो क्या एक व्हाट्सऐप ग्रुप का सदस्य होना अवैध है?’’

खालिद के वकील ने कहा कि अभियोजन ने जिन पांच व्हाट्सऐप समूह का जिक्र किया है,वह उनमें से केवल दो ग्रुप का सदस्य था और उनमें भी वह खामोश था और उसने केवल एक ग्रुप में चार संदेश पोस्ट किए थे।

खालिद ने अपनी दलील में कहा, ‘‘ यह तथ्य कि मैं दो व्हाट्सऐप ग्रुप का हिस्सा था, मुझे आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं ठहरा सकते। मैं नहीं कह रहा कि उन ग्रुप में कुछ भी आपराधिक था....।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं ग्रुप का कोई एडमिन नहीं हूं, मैं ग्रुप का एक सदस्य भर हूं। एडमिन कोई और है। अगर किसी और ने कुछ कहा है तो उसे मेरे ऊपर नहीं डाला जा सकता।’’

उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में सीएए के समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पों के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे जिसमें 53 लोगों की मौत हुई थी और करीब 700 लोग जख्मी हुए थे।

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