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देश की खबरें | 2019 जामिया हिंसा: अदालत ने शरजील इमाम के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2019 के जामिया हिंसा मामले में कार्यकर्ता शरजील इमाम के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश देते हुए कहा कि वह न केवल भीड़ को भड़काने वाला था, बल्कि ‘हिंसा भड़काने की एक बड़ी साजिश का सरगना’ भी था।

देश की खबरें | 2019 जामिया हिंसा: अदालत ने शरजील इमाम के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया

नयी दिल्ली, 10 मार्च दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2019 के जामिया हिंसा मामले में कार्यकर्ता शरजील इमाम के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश देते हुए कहा कि वह न केवल भीड़ को भड़काने वाला था, बल्कि ‘हिंसा भड़काने की एक बड़ी साजिश का सरगना’ भी था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विशाल सिंह ने कहा कि जामिया विश्वविद्यालय के पास 13 दिसंबर को दिया गया इमाम का भाषण ‘जहरीला’ था।

अदालत ने कहा, ‘‘एक धर्म को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने वाला और वास्तव में यह एक नफरत फैलाने वाला भाषण था।’’

अदालत इमाम और अन्य के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रही थी जिनके खिलाफ ‘न्यू फ्रेंड्स’ कॉलोनी पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (पीडीपीपी) और शस्त्र अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा मामले की जांच कर रही है।

अदालत ने सात मार्च को दिए गए आदेश में कहा था, ‘‘यह स्पष्ट है कि एक बड़ी भीड़ का एकत्र होना और उसके द्वारा बड़े पैमाने पर दंगा करना एक आकस्मिक या स्वतः स्फूर्त घटना नहीं थी और इसे स्वयंभू नेताओं और भीड़ को भड़काने वालों के बीच एक बड़ी साजिश के अलावा और किसी अन्य तरह से अंजाम नहीं दिया जा सकता था। इसके अलावा भीड़/गैरकानूनी सभा के अन्य सदस्य भी दंगे में शामिल होते रहे।’’

इसने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर ध्यान दिया कि इमाम ने 13 दिसंबर, 2019 को एक भाषण दिया था, जिसमें उसने यह कहकर अपने श्रोताओं को उकसाया था कि उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में काफी मुस्लिम आबादी होने के बावजूद, वे शहरों को सामान्य रूप से काम करने की अनुमति क्यों दे रहे हैं, वे चक्का जाम (सार्वजनिक आवाजाही को रोकना) क्यों नहीं करते?

तीन अन्य आरोपियों की भूमिका पर अदालत ने कहा, ‘‘आरोपी आशु खान, चंदन कुमार और आसिफ इकबाल तन्हा ने पूर्व षड्यंत्र के तहत उकसावे के साथ-साथ घटनास्थल पर हिंसक भीड़ की गतिविधि को भड़काया, जिसके लिए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 109 (उकसाने) का दंडात्मक प्रावधान लागू किया जाता है।’’

धारा 109 किसी अपराध के लिए उकसाने से संबंधित है और इसके लिए अपराधी को दी गई सजा के बराबर ही सजा दी जाती है।

इमाम पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया गया है, जिसमें उकसाना, आपराधिक साजिश, समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना, दंगा करना, गैरकानूनी रूप से एकत्र होना, गैर इरादतन हत्या का प्रयास, लोक सेवक के काम में बाधा डालना, आग या विस्फोटक पदार्थ द्वारा उत्पात मचाना से जुड़ी धाराएं शामिल हैं। इसके अलावा उसके खिलाफ पीडीपीपी के तहत भी आरोप तय करने का आदेश दिया गया।

अदालत ने अनल हुसैन, अनवर, यूनुस और जुम्मन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और पीडीपीपी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोप तय करने का आदेश देते हुए कहा कि एक पुलिस गवाह और उनके मोबाइल फोन रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि वे दंगाई भीड़ का हिस्सा थे।

यह मामला 11 दिसंबर, 2019 को संसद में नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित होने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया और शाहीन बाग में 2019-2020 के विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Mar 10, 2025 09:24 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).