जरुरी जानकारी | कोयले को आपूर्ति केंद्र तक पहुंचाने की 19 नई परियोजनाएं शुरू की जाएंगीः कोयला मंत्रालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि सरकारी स्वामित्व वाली कोयला कंपनियों सीआईएल और एससीसीएल की 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' वाली 19 अतिरिक्त परियोजनाएं वर्ष 2026-27 तक शुरू की जाएंगी।

नयी दिल्ली, दो जनवरी केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि सरकारी स्वामित्व वाली कोयला कंपनियों सीआईएल और एससीसीएल की 'फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी' वाली 19 अतिरिक्त परियोजनाएं वर्ष 2026-27 तक शुरू की जाएंगी।

फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) का आशय कोयला को खदान के निकासी स्थल से उसे आपूर्ति वाले केंद्र तक पहुंचाने से है। प्रेषण बिंदु यानी आपूर्ति केंद्र पर पहुंचने के बाद कोयले को गंतव्य स्थल तक भेजा जाता है।

कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) के लिए 33 करोड़ टन ढुलाई क्षमता वाली 19 नई एफएमसी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। इन परियोजनाओं को वर्ष 2026-27 तक पूरा किया जाएगा।

कोयला मंत्रालय पहले से ही 18,000 करोड़ रुपये मूल्य की 55 एफएमसी परियोजनाएं संचालित कर रहा है। इनमें से 9.55 करोड़ टन प्रति वर्ष की वहन क्षमता वाली आठ परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं जबकि बाकी परियोजनाएं वर्ष 2024-25 तक चालू होंगी।

कोयला खदानों से कोयले की पर्यावरण-अनुकूल निकासी सुनिश्चित करने के लिए सरकार 'राष्ट्रीय कोयला लॉजिस्टिक योजना' के विकास पर काम कर रही है। इनमें खदान के नजदीक रेल पटरियां बिछाने के अलावा कोयला क्षेत्रों में रेल नेटवर्क स्थापित करने पर जोर दिया गया है।

कोयला मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 तक 1.31 अरब टन कोयले का वार्षिक उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है। खदानों से निकले कोयले को किफायती दर एवं सुविधाजनक ढंग से गंतव्य तक पहुंचाना इस दिशा में एक अहम कदम होगा।

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