नयी दिल्ली, एक मई एक सरकारी समिति ने कोयला खनन क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी दिये जाने के हालिया निर्णय की सराहना की है। समिति का कहना है कि विदेशी खनन कंपनियों के घरेलू बाजार में आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे कोयला खनन क्षेत्र की दक्षता बेहतर होगी और बिजली उद्योग के लिये कोयले की कमी की समस्या से राहत मिलेगी।
वित्त मंत्रालय ने आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) का खाका तैयार करने के लिये इस कार्य बल का गठन किया। कार्य बल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बुधवार को सौंपी अंतिम रिपोर्ट में ये सुझाव दिये हैं।
कार्य बल ने 2020-25 तक देश में बुनियादी संरचना की परियोजनाओं में कुल 111 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत का अनुमान व्यक्त किया है।
कार्य बल ने कहा, ‘‘हालिया नीति में कोयला खनन में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने से विदेशी खनन कंपनियों के भारत में प्रवेश करने, अपनी बेहतर खनन तकनीक लाने और घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा में तेजी लाने की उम्मीद है।’’
उसने कहा कि यह निर्णय आयातित कोयले पर निर्भरता को कम करने में भी मदद करेगा, और जिससे आयात का खर्च कम होगा।
कार्य बल ने कहा कि इसी तरह की दिक्कतों ने भारत में गैस आधारित बिजली संयंत्रों को प्रभावित किया है, जहां घरेलू गैस की अनुपलब्धता और आयातित गैस की ऊंची लागत ने कई गैस आधारित संयंत्रों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है।
रिपोर्ट में कहा गया कि कोयले की खराब गुणवत्ता और अनियमित आपूर्ति के साथ-साथ तापीय बिजली संयंत्रों के लिये किये जा रहे कड़े उत्सर्जन प्रावधानों से संबंधित चिंताओं को दूर करने की तत्काल आवश्यकता है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में पिछले साल कोयला खनन और इससे संबंधित बुनियादी ढांचे में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दी गई थी।
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