बेंगलुरु, तीन दिसंबर कर्नाटक विधानसभा का 10 दिवसीय सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है और इस दौरान विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा उसका सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) कांग्रेस सरकार की ‘विफलताओं’ को उठा सकता है।
लोकसभा चुनावों में कुछ महीने का वक्त रहने के चलते, कर्नाटक में एकजुट विपक्ष राज्य में व्याप्त गंभीर सूखे की स्थिति से निपटने में कथित विफलता के लिए सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।
कर्नाटक सरकार ने 236 तालुकों में से 223 में सूखा घोषित कर दिया है। सूखे की स्थिति देखने के लिए एक केंद्रीय टीम ने भी राज्य का दौरा किया था।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अनुकूल चुनाव नतीजों से उत्साहित भाजपा ने सूखा प्रभावित किसानों को कोई राहत देने में सरकार की निष्क्रियता को उजागर करने का फैसला किया है।
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक, पार्टी सत्तारूढ़ कांग्रेस को 'युवा निधि' शुरू करने की तारीख बताने की मांग कर सकती है। यह कांग्रेस की पांच ‘गारंटी’ में एक है जिसे अब तक शुरू नहीं किया गया है।
‘युवा निधि’ के तहत वादा किया गया था कि इस साल परीक्षा पास करने वाले युवाओं को अगर छह महीने के अंदर नौकरी नहीं मिली तो स्नातकों को तीन हज़ार रुपये और डिप्लोमा धारकों को 1500 रुपये दिए जाएंगे।
मांड्या में कन्या भ्रूण हत्या का मुद्दा भी सदन में गूंज सकता है। इस मामले में 900 से अधिक भ्रूण हटाए गए थे। जनता दल (सेक्युलर) पैसे लेकर अधिकारियों की तैनाती करने के कथित मुद्दे को उठा सकता है और उसका आरोप है कि इसमें मंत्री भी शामिल हैं। 15 दिसंबर तक चलने वाले 10 दिवसीय सत्र में कई विधेयक भी पेश किए जा सकते हैं।
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