देश की खबरें | कृषि कानून विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज मामले अब तक झेल रहे 1.48 लाख किसान: शर्मा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा की समन्वय समिति के सदस्य शिव कुमार शर्मा ने सोमवार को दावा किया कि इस आंदोलन के दौरान देशभर में 1.48 लाख प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को सरकार के वादे के उलट अब तक वापस नहीं लिया गया है।
इंदौर (मध्यप्रदेश), 12 जून केंद्र के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संयुक्त किसान मोर्चा की समन्वय समिति के सदस्य शिव कुमार शर्मा ने सोमवार को दावा किया कि इस आंदोलन के दौरान देशभर में 1.48 लाख प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को सरकार के वादे के उलट अब तक वापस नहीं लिया गया है।
गौरतलब है कि दिल्ली की सरहदों पर साल भर चले किसान आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 नवंबर 2021 को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी।
"कक्काजी" के नाम से मशहूर शर्मा संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष हैं। उन्होंने इंदौर प्रेस क्लब में संवाददाताओं से कहा कि नये कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के दौरान अलग-अलग राज्यों में कुल 1.48 लाख किसानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
उन्होंने कहा,‘‘सरकार ने आंदोलन खत्म होने के बाद हमसे वादा किया था कि 30 दिन के भीतर ये सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे, लेकिन ये मुकदमे अब तक चल रहे हैं। मैं खुद और बहुत बड़ी तादाद में किसान इन मुकदमों की अदालती पेशियों पर जाने को मजबूर हैं।’’
शर्मा ने खरीफ फसलों के लिए सरकार की ओर से हाल ही में घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को ‘‘छलावा’’ करार दिया और कहा कि किसानों को एमएसपी के आंकड़ों के जाल में उलझाया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 23 जिंसों पर एमएसपी बढ़ाई जाए और एमएसपी पर इनकी सरकारी खरीद का कानून बनाया जाए।
शर्मा ने मंदसौर गोली कांड की जांच के लिए गठित जैन आयोग की रिपोर्ट को अब तक सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर मध्यप्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा,‘‘यह रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। सरकार जांच के लिए आयोग तो बना देती है। लेकिन लगता है कि आयोग बनाने का मतलब मामले को रफा-दफा करना होता है।’’
गौरतलब है कि मंदसौर में छह जून 2017 को किसान आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी के बाद छह कृषकों की मौत हो गई थी।
हर्ष
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