देश की खबरें | वायरस : निजी एम्बुलेंस को नियंत्रण में लेना काफी महंगा होगा , महाराष्ट्र सरकार ने उच्च न्यायालय से कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि निजी तौर पर संचालित एम्बुलेंस को अपने नियंत्रण में लेना काफी महंगा होने के कारण यह उसके लिए संभव नहीं होगा। हालांकि, कहा कि लोग अस्पताल जाने के लिए निजी वाहन, टैक्सी और ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि लॉकडाउन की पाबंदियों में ढील दी गई है।
मुंबई, नौ जून महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि निजी तौर पर संचालित एम्बुलेंस को अपने नियंत्रण में लेना काफी महंगा होने के कारण यह उसके लिए संभव नहीं होगा। हालांकि, कहा कि लोग अस्पताल जाने के लिए निजी वाहन, टैक्सी और ऑटो रिक्शा का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि लॉकडाउन की पाबंदियों में ढील दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायाधीश एसएस शिंदे की खंडपीठ को महाधिवक्ता आशुतोष कुंभाकोनी ने बताया कि सरकार निजी एम्बुलेंस को तब नियंत्रण में लेने पर विचार करेगी, यदि उसके खिलाफ शिकायत मिलती है कि वे काम नहीं कर रहे हैं अथवा मरीज को ले जाने से इंकार कर रहे हैं।
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पीठ पूर्व सांसद किरीट सोमैया की ओर से दाखिल उस याचिका की सुनवाई कर रही थी, जिसमें शहर और राज्य में एम्बुलेंस की कमी को लेकर चिंता जतायी गई।
पिछले सप्ताह, अदालत ने सरकार से निजी एम्बुलेंस को अपने नियंत्रण में लेने पर विचार करने को कहा था।
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इस पर, कुंभाकोनी ने मंगलवार को कहा कि निजी एम्बुलेंस को नियंत्रण में लेना काफी महंगा होगा इसलिए यह संभव नहीं है।
उन्होंने अदालत से कहा, '' लॉकडाउन में ढील और शहर की सीमा के भीतर आवाजाही की इजाजत के बाद यदि यह कोविड-19 से संबंधित मामला नहीं है तो लोग अस्पताल जाने के लिए अपनी कार, टैक्सी और ऑटो का इस्तेमाल कर सकते हैं।''
कुंभाकोनी ने कहा कि एक विवरण तैयार किया जाएगा और उसे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की वेबसाइट पर डाला जाएगा, जिसमें हर इलाके में कार्यरत सभी निजी एम्बुलेंस का पूरा ब्यौरा और संपर्क करने के लिए फोन नंबर उपलब्ध रहेगा ताकि जनता सीधे उनसे संपर्क कर सके।
इस पर अदालत ने सरकार को सुझाव दिया कि वह मरीज को ले जाने पर निजी एम्बुलेंस के लिए किराए की अधिकतम सीमा तय करने पर विचार करे।
पीठ ने मामले को अगली सुनवाई 23 जून के लिए तय की।
याचिका के मुताबिक, शहर में 20 मार्च तक निजी समेत कुल 3,000 एम्बुलेंस थीं। हालांकि, कोविड-19 महामारी प्रकोप के बाद यह गिरकर 100 रह गईं।
सोमैया ने एम्बुलेंस की कमी को लेकर राज्य सरकार और महानगर पालिका पर इस मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने विभागों को शहर में तत्काल एम्बुलेंस की संख्या में इजाफा करने के लिए कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की थी।
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