देश की खबरें | प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए 10 जून तक उपलब्ध कराएं शेष मांग: रेलवे ने राज्यों से कहा

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नयी दिल्ली, नौ जून उच्चतम न्यायालय के निर्देश के कुछ घंटे बाद रेलवे ने राज्यों को पत्र लिखकर उनसे कहा है कि वे प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए 10 जून तक श्रमिक विशेष ट्रेनों के लिए ‘‘समग्र शेष’’ मांग उपलब्ध कराएं।

शीर्ष अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया है कि वह प्रवासी मजदूरों की घर वापसी की प्रक्रिया अगले 15 दिन में पूरी करे।

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रेलवे एक मई से लेकर अब तक 4,347 श्रमिक विशेष ट्रेनों के जरिए लगभग 60 लाख लोगों को उनके गंतव्य राज्यों में पहुंचा चुका है।

राज्यों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा मंगलवार को दिए गए निर्देश के अनुरूप रेलवे किसी अतिरिक्त मांग की स्थिति में प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए राज्यों के आग्रह पर 24 घंटे के भीतर श्रमिक स्पेशल ट्रेन उपलब्ध कराएगा।

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उन्होंने कहा कि राज्य अब तक इस तरह के 141 आग्रह पहले ही रेलवे से कर चुके हैं।

यादव ने मंगलवार को जारी पत्र में लिखा, ‘‘इस परिप्रेक्ष्य में, आप कृपया फंसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए अपने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से यात्रियों की संख्या, यात्रा प्रारंभ होने के स्टेशन, गंतव्य स्टेशन, कार्यक्रम और परिवहन के संपन्न होने की तारीखों सहित श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के लिए समग्र शेष मांग का परामर्श दे सकते हैं।’’

पत्र में उन्होंने लिखा है, ‘‘कृपया ब्योरा आधिकारिक पत्र के माध्यम से 10 जून तक भेजा जा सकता है।’’

यादव ने पूर्व में 29 मई और तीन जून को राज्य सरकारों को पत्र लिखकर श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की मांग के बारे में सूचना मांगी थी।

सूत्रों ने कहा कि अभी रेलवे के पास ऐसी 13 ट्रेन लंबित हैं जिनमें 10 पश्चिम बंगाल के लिए और एक-एक बिहार, नगालैंड तथा ओडिशा के लिए है जिनके मंगलवार को रवाना होने का कार्यक्रम है।

दस ट्रेन केरल से, दो ट्रेन तमिलनाडु से और एक ट्रेन कर्नाटक से रवाना हो रही है।

यादव ने पत्र में कहा, ‘‘मैं आपको आश्वासन देना चाहूंगा कि भारतीय रेलवे आग्रह के 24 घंटे के भीतर वांछित संख्या में श्रमिक स्पेशल ट्रेन उपलब्ध कराएगा। भारतीय रेलवे अल्पावधि में किसी अतिरिक्त मांग को भी पूरा करेगा।’’

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे सभी प्रवासी मजदूरों को 15 दिन के भीतर उनके घर भेजें और उनके पुनर्वास के लिए उनके कौशल का आकलन करने के बाद उनके लिए रोजगार योजनाएं लागू करें।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने केंद्र को यह निर्देश भी दिया कि वह प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए राज्यों की मांग पर 24 घंटे के भीतर अतिरिक्त ट्रेन उपलब्ध कराए।

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