नयी दिल्ली, छह अक्टूबर घरों में पृथक-वास में रहने वाले मरीजों की कड़ी निगरानी, रोगियों के संपर्क में आने लोगों की जोर-शोर से पहचान और सूक्ष्म स्तर पर निषिद्ध क्षेत्रों के निर्माण एवं व्यापक जागरूकता अभियान के माध्यम से मानव व्यवहार में बदलाव की कोशिश दिल्ली की संशोधित कोविड-19 प्रबंधन रणनीति का हिस्सा होंगे, जिन पर मंगलवार को डीडीएमए की बैठक में चर्चा हुई। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
वैसे सिनेमाघरों, थियेटर और स्वीमिंग पुल अभी बंद ही रहेंगे क्योंकि उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में हुई दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की बैठक में इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। प्रशासन द्वारा रामलीला पर भी फैसला किया जाना अभी बाकी है।
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बैठक में यह भी तय किया गया कि महामारी की गंभीरता को देखते हुए संक्रमण को रोकने, मेडिकल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, मरीजों के स्वस्थ होने की दर में सुधार करने और कोविड-19 से होने वाली मौतें घटाने पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
पिछले महीने बैजल ने छह सदस्यीय एक विशेषज्ञ दल से राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 की वर्तमान स्थिति से उबरने और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के तौर -तरीके सुझाने को कहा था।
एक सूत्र ने कहा, ‘‘ डीडीएमए की बैठक में पैनल ने कई सुझाव दिये जिनमें घरों में पृथक-वास में रहने वाले मरीजों की कड़ी निगरानी, सूक्ष्म स्तरपर निषिद्ध क्षेत्रों के निर्माण और रोगियों के संपर्क में आने लोगों की जोर-शोर से पहचान शामिल हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ पैनल ने महसूस किया कि मानवीय आचरण में बदलाव की जरूरत है जिसे व्यापक अभियान के जरिए प्राप्त किया जा सकता है।’’
सूत्र ने कहा कि चूंकि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 मामलों में गिरावट आ रही है, ऐसे में वर्तमान कोविड-19 प्रबंधन रणनीति पूरी तरह नहीं बदली जा सकती है।
डीडीएमए की इस बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, नीति आयोग के सदस्य वी के पॉल, एम्स निदेशक रणदीप गुलेरिया एवं अन्य ने हिस्सा लिया।
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