बर्लिन में एयरोस्पेस शो ‘आईएलए बर्लिन’ में देश-विदेश से आई कंपनियों ने हाई-टेक ड्रोन और मिसाइलों की नुमाइश की. इस शो की खास बात यह भी रही कि यहां युवाओं के लिए रोजगार के कई मौके दिखे.जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एयरोस्पेस शो में दिखा कि आने वाले वर्षों में एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर में युवाओं के लिए रोजगार और करियर के अवसर तेजी से बढ़ने वाले हैं. युवाओं की चिंता है कि नौकारियां कहां हैं, किस सेक्टर में उन्हें नौकरी मिल सकती हैं और ऐसी कौन-सी नौकारियां हैं, जिसमें एआई उनकी जगह नहीं ले पाएगा. बर्लिन में ‘आईएलए बर्लिन' ऐसे सवालों का जवाब ढूंढने के लिए सटीक जगह रही.
एआई के बावजूद युवाओं के लिए नौकरी की पेशकश
बहुत से युवा सोचते हैं कि एयरोस्पेस सेक्टर में नौकरी केवल पायलट या अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को मिलती है. हालांकि आज के समय में एयरोस्पेस इंडस्ट्री को मेकैनिकल इंजीनियर, इलेक्ट्रिकल इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, एआई एक्सपर्ट, डेटा एनालिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट, प्रोजेक्ट मैनेजर और बिजनेस प्रोफेशनल्स की भी खूब जरूरत है.
इस शो का ध्यान ना केवल नई टेक्नोलॉजी बनाने और उसे पेश करने पर था, बल्कि यहां एआई और इंसानों से होने वाले कमाल के हाई-टेक इनोवेशन भी केंद्र में रहे. एआई से चलने वाले हाई-टेक ड्रोन या हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने उड़ने वाले हवाई जहाज का भविष्य. डिफेंस से लेकर एयरोस्पेस में इस्तेमाल होने वाला हर तरह का हाई-टेक इनोवेशन यहां मौजूद था.
इस एयरोस्पेस शो में 37 देशों की 765 से अधिक कंपनियों ने हिस्सा लिया. इस एयरोस्पेस शो का खास ध्यान युवाओं को एयरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर कंपनी से जोड़ने पर था. लगभग 3,500 लोगों ने ‘आईएलए बर्लिन' के टैलेंट हब में भाग लिया था. कुल 690 एग्जिबिटर कंपनियों ने लगभग 115 नौकरियों की पेशकश रखी थी. इसके तहत नए मौकों के तलाश में ये हजारों युवा सीधे तौर पर कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर अपने हुनर और कुशलता के आधार पर नौकरियों के लिए आवेदन कर सकते हैं.
जर्मन कंपनी में भविष्य बनाने का मौका
‘आईएलए बर्लिन' के टैलेंट हब में भाग ले रही कंपनियां सिर्फ मंझे हुए इंजीनियर ही नहीं बल्कि अपने करियर की शुरुआत करने वालों के लिए भी यहां खास मौके पेश करती नजर आईं. जर्मन कंपनी ‘हेनजॉलड्ट' और जर्मन आर्मी ‘बुंडेसवेयर' करियर की शुरुआत करने वाले युवाओं के लिए खास ‘आउसबिल्डुंग' प्रोग्राम की पेशकश करते दिखे. ‘आउसबिल्डुंग' यानी ‘डुअल ट्रेनिंग' प्रणाली जिसके तहत युवा जर्मनी में किसी कंपनी के साथ काम सीखने का मौका पाते हैं और ट्रेनिंग करने के साथ-साथ पैसा भी कमा सकते हैं.
कई युवाओं के लिए अक्सर जर्मन कंपनी में काम करने के लिए सबसे बड़ी अड़चन भाषा होती है. वह सब तरह से निपुण होते हैं लेकिन भाषा का ज्ञान नहीं होने के कारण वह अक्सर मात खा जाते हैं. ‘आईएलए बर्लिन' के टैलेंट हब में ऐसे पेशकश की भी भरमार थी, जिसके लिए फर्राटेदार जर्मन भाषा आना जरूरी नहीं था. एयरबस और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी जैसे कई यूरोपीय कंपनियों में अंग्रेजी भाषा के आधार पर नौकारी पाना संभव दिखा.
महिलाओं की भागीदारी पर जोर
भारत के आदित एयरबस में स्ट्रक्चरल डिजाइन इंजीनियर हैं. वह ‘आईएलए बर्लिन' में "नए मौकों की तलाश में आए हैं." वह लुफ्थांसा समेत कई जर्मन विमानन क्षेत्र की कंपनी के पास जाकर उनकी जरूरतों के बारे में समझने की कोशिश कर रहे हैं.
जब बात साइंस, रिसर्च, डिफेंस की होती है, तो महिलाएं अक्सर पीछे दिखती हैं. हालांकि, ‘आईएलए बर्लिन' में केंद्र में रही. लुफ्थांसा की कमर्शियल एयरलाइन पायलट राया कात्स ने माहिलाओं के लिए खास पैनल में औरतों की भागीदारी को काफी जरूरी बताया. इसके साथ ही कई महिलाएं बढ़-चढ़ कर एयरोस्पेस शो में भाग लेती नजर आई. चाहे मंच के उस तरफ नजर आ रही अंतरिक्ष यात्री हो या मंच के इस तरफ खड़ी होकर विमानन क्षेत्र में अपनी जगह की तलाश करती हुई युवा महिलाएं.
आने वाले वर्षों में अवसर और बढ़ेंगे
यूरोप इस समय अंतरिक्ष तकनीक, रक्षा प्रणालियों और नई विमानन तकनीकों में बड़े निवेश कर रहा है. जर्मन सरकार ने भी हाल ही में विमानन और एयरोस्पेस क्षेत्र को मजबूत करने की नई रणनीति पेश की है. इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में रिसर्च, उत्पादन, सॉफ्टवेयर विकास और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में कुशल युवाओं की मांग बढ़ सकती है.
विशेष रूप से सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस मिशन, ड्रोन सिस्टम, ग्रीन एविएशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में नए अवसर बनने की संभावना है. इसका इशारा जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के बयान से भी मिलता है. उन्होंने ‘आईएलए बर्लिन' में अपने भाषण में कहा कि देश का एयरोस्पेस उद्योग केवल तकनीकी नवाचार और आर्थिक विकास को ही गति नहीं देता, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.













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