IMD Monsoon Forecast 2026: अल नीनो और कमजोर मानसून के पूर्वानुमान ने सरकार को दी अग्रिम तैयारी की दिशा; केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में दी जानकारी
भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के दौरान 'अल नीनो' के प्रभाव से सामान्य से कम बारिश के पूर्वानुमान जारी किए जाने से सरकार और विभिन्न मंत्रालयों को पहले से तैयारी और जल प्रबंधन की योजना बनाने में मदद मिली है.
नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) (IMD) द्वारा दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 के लिए 'अल नीनो' (El Nino) की उपस्थिति और सामान्य से कम वर्षा का पूर्वानुमान जारी किए जाने से केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को अग्रिम तैयारी में बड़ी सहायता मिली है. केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को संसद में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि आईएमडी द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले पूर्वानुमानों और अलर्ट से कृषि, गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को सूखा प्रबंधन व जल संसाधनों के उचित नियोजन के लिए पहले ही सतर्क कर दिया गया था. यह भी पढ़ें: El Nino Alert 2026: डब्ल्यूएमओ की गंभीर चेतावनी; अगस्त तक अल नीनो आने की 80% संभावना, भारत में कमजोर मानसून और भीषण गर्मी का बढ़ा खतरा
मानसूनी बारिश के पूर्वानुमान और संशोधन
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, आईएमडी ने 13 अप्रैल को जारी अपने पहले चरण के लॉन्ग रेंज फोरकास्ट (LRF) में मौसमी बारिश दीर्घकालिक औसत (LPA) का 92 प्रतिशत रहने की संभावना जताई थी, जिसे बाद में संशोधित कर 90 प्रतिशत किया गया.
आईएमडी दैनिक आधार पर बारिश के आंकड़े और मासिक आधार पर अल नीनो की स्थिति पर अपडेट जारी करता है. इसके अलावा जिला और ब्लॉक स्तर पर भी मानसूनी बारिश का विस्तृत ब्योरा संबंधित हितधारकों के साथ साझा किया जाता है. कृषि मंत्रालय के 'क्रॉप वेदर वॉच' के तहत मौसम विभाग हर सप्ताह पिछले दौर की बारिश और अगले दो हफ्तों के संभावित पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है.
अल नीनो का भारतीय मानसून पर प्रभाव
सामान्य तौर पर अल नीनो वर्षों के दौरान भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून कमजोर हो जाता है.
- ऐतिहासिक आंकड़े: वर्ष 1950 से अब तक देश में 16 अल नीनो वर्ष रहे हैं, जिनमें से 7 वर्षों में भारतीय मानसून प्रभावित हुआ और बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई.
- सितंबर महीने में अधिक असर: केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि अल नीनो का असर मानसून के उत्तरार्ध, विशेषकर सितंबर महीने के दौरान मानसूनी बारिश पर अधिक दिखाई देता है.
अंतर-विभागीय समन्वय और वैज्ञानिक प्रयास
आईएमडी नियमित रूप से मौसम, जलवायु पूर्वानुमान और शुरुआती चेतावनियां जारी करता है, जो सभी केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों को समय पर प्रसारित की जाती हैं.
इसके साथ ही, 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी' (IITM) वर्ष 2026 के प्रायोगिक पूर्वानुमानों के आधार पर कृषि और बांध प्रबंधन विभागों के साथ मिलकर काम कर रहा है. इसका उद्देश्य कृषि और जल प्रबंधन पर अल नीनो और वर्षा के पैटर्न के प्रभाव का पहले से आकलन कर बेहतर रणनीतियां बनाना है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 05, 2026 04:40 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

