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पोलैंड और जर्मनी के रिश्तों में मिठास घोलेगा टस्क का दौरा

पोलैंड के नए प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क एक ही दिन में अपने पेरिस दौरे के बाद जर्मन राजधानी बर्लिन में जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्त्स से मिलेंगे.

पोलैंड और जर्मनी के रिश्तों में मिठास घोलेगा टस्क का दौरा
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

पोलैंड के नए प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क एक ही दिन में अपने पेरिस दौरे के बाद जर्मन राजधानी बर्लिन में जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्त्स से मिलेंगे. ये मुलाकातें यूरोप में पोलैंड की नई भूमिका के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही हैं.पोलैंड के नए उदारवादी प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की बर्लिन यात्रा एक तरह का संतुलन बनाने की कोशिश लगती है. टस्क जर्मनी के साथ अपने देश के खराब संबंधों को सुधारने के इच्छुक हैं, मगर इसे सावधानी और जिम्मेदारी के साथ करने की जरूरत है.

जारोस्लाव केजिंस्की के नेतृत्व वाले पोलैंड के मुख्य विपक्षी दल 'नेशनल कंजर्वेटिव लॉ एंड जस्टिस पार्टी' (पीआईएस) की गहरी नजर प्रधानमंत्री के इस दौरे पर होगी. खासकर तब, जब विपक्षी दल ने कई बार टस्क को एक ‘जर्मन एजेंट' करार दिया है.

पोलैंड और जर्मनी के रिश्तों में खटास का कारण बने थे केजिंस्की

2015 से 2023 के बीच आठ साल तक पोलैंड पर शासन करने वाली केजिंस्की की पार्टी ने यूरोपीय राजनीति में खटास पैदा की. केजिंस्की की पार्टी जब सत्ता में थी तब भी उसने यूरोप की बजाए अमेरिका और खासकर डॉनल्ड ट्रंप से अच्छे संबंध बनाने की कोशिशें कीं. इस वजह से जर्मनी और फ्रांस के साथ पोलैंड के रिश्ते खराब हुए थे.

2023 के अंत में जब पीआईएस को लोगों ने बाहर का रास्ता दिखाया, उस समय भी जर्मनी और पोलैंड के रिश्ते ज्यादा अच्छे नहीं थे. ऐसा आखिरी बार 1980 के दशक के अंत में ही देखा गया था जब वहां कम्युनिज्म का पतन हुआ था.

पिछले अक्टूबर पोलैंड के संसदीय चुनाव के दौरान पीआईएस ने दावा किया था कि जर्मनी पोलैंड की संप्रभुता के लिए सबसे बड़ा खतरा है और टस्क विदेशी, जर्मन हितों को पहले देखते हैं, और पौलैंड उनके लिए बाद में आता है.

चुनावी हार के बाद केजिंस्की ने अपनी पार्टी की ओर से जर्मन-विरोधी बयानबाजी और तेज कर दी. यहां तक कि शासन को बहाल करने के टस्क के तरीकों पर उंगली उठाते हुए अडोल्फ हिटलर से उनकी तुलना भी की.

बर्लिन में भी दौड़ी टस्क की जीत की खुशी की लहर

जब नई पोलिश गठबंधन सरकार ने दिसंबर के मध्य में सत्ता संभाली, तो उस जीत की गूंज बर्लिन संसद के गलियारों में भी सुनाई दी. जर्मन संसद में चांसलर शॉल्त्स ने टस्क को उनके पद संभालने पर बधाई दी और सहयोग का हाथ भी बढ़ाया.

शॉल्त्स ने कहा था, "यूरोप में और यूरोप के लिए पोलैंड की भूमिका आज पहले से कहीं ज्यादा अहम हो गई है." अपने बयान में उन्होंने उम्मीद जताई थी कि जर्मनी और पोलैंड अब द्विपक्षीय संबंधों को आगे लेकर जाएंगे. चांसलर शॉल्त्स ने तब "आने वाले हफ्तों में" बर्लिन में टस्क का स्वागत करने की उम्मीद भी जताई थी.

पहले पोलैंड बाद में बाकी देश

यह कहना सही होगा कि पोलैंड के प्रधानमंत्री को जर्मनी आते-आते 2 महीने लग गए क्योंकि वैसे ही टस्क की गठबंधन वाली सरकार जब बन रही थी तब विपक्षी दल पीआईएस ने उसमें खूब अड़ंगे लगाए थे. इस कारण सरकार बनने में देरी भी हुई. इतनी बाधाओं के बाद जब आखिरकार सरकार बनी तो टस्क विदेश नीति को कुछ समय के लिए दरकिनार कर घरेलू मसले सुलझाने में लग गए.

यूरोपियन काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस के वारसॉ कार्यालय के प्रमुख पियोत्र बुरास का कहना है कि इसके अलावा भी कई और कारण रहे. राजनीतिक मामलों के जानकार बुरास ने कहा, "जब जर्मनी की बात आती है तो टस्क बेहद सतर्क रहते हैं ताकि दक्षिणपंथी लोकलुभावनवादियों को आलोचना का कोई बहाना न मिल जाए." बुरास ने डीडब्ल्यू को बताया कि टस्क ने अपने पहले सरकारी बयान में भी जर्मनी का कोई जिक्र नहीं किया था. उन्होंने यह भी कहा कि उनके विचार में, दौरों के लिए टस्क का चुना हुआ क्रम - पहले पेरिस, फिर बर्लिन - कोई संयोग नहीं है.

पीआईएस की जर्मन विरोधी बयानबाजी

बुरास का कहना है, "आठ साल के जर्मन-विरोधी प्रचार ने पोलिश समाज पर गहरी छाप छोड़ी है. जर्मनी के बारे में जब-जब बहस हुई है, तब-तब पीआईएस हावी रही है.” उनका मानना है कि इसी कारण से टस्क अभी सतर्क रहेंगे, कम-से-कम तब तक जब तक जून में यूरोप के चुनाव नहीं हो जाते.

जर्मन पोलैंड इंस्टीट्यूट के उप निदेशक एग्निज्का लाडा-कोनफल ने पुष्टि की, "टस्क को जर्मनी पर पीआईएस की बयानबाजी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है." हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जर्मन सरकार टस्क की मजबूरी समझती है. लाडा-कोनफल ने डीडब्ल्यू को बताया कि "बर्लिन कोई निराशा, अधीरता या अविश्वास नहीं दिखा रहा है." उन्होंने कहा कि जर्मन जानते हैं कि उन्हें वारसॉ पर कुछ भी थोपने से बचना चाहिए और उन्हें "बड़े भाई की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए जो छोटे भाई को बताता रहता है कि क्या करना है.”

पोलिश-जर्मन संबंधों में बदलाव

बुरास और लाडा-कोनफल दोनों इस बात पर एकमत दिखे कि पोलैंड और जर्मनी के रिश्ते पहले की तरह शायद अब कभी नहीं हो पाएंगे. सन 1989 में कम्युनिज्म के पतन के बाद पोलैंड के पहले गैर-कम्युनिस्ट विदेश मंत्री क्रिजिस्तोफ स्कुबिस्जेव्स्की ने "पोलिश-जर्मन समुदाय के हित" के बारे में बात करना शुरू किया, जिसे बाद में उन्होंने "कम्युनिटी ऑफ डेस्टिनी" कहा था.

लाडा-कोनफाल कहती हैं कि "अब स्थिति अलग है." उन्होंने कहा, "चूंकि टस्क पांच साल तक यूरोपीय परिषद के प्रमुख रहे हैं, इस वजह से भी उनका प्रभाव काफी बढ़ गया है." लाडा-कोनेफल के अनुसार, यूक्रेन के लिए अपनी उदार सैन्य सहायता और लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों को अपने यहां लेने के कारण दुनिया में पोलैंड की भूमिका भी बड़े पैमाने पर बदल गई है. साथ ही उन्होंने कहा कि रूस पर जर्मनी की नीति और उसके घरेलू मामलों में दखल ने उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को धूमिल किया है. इस कारण पोलैंड शायद अब ज्यादा अहम भूमिका निभा रहा है.

संबंधों को सामान्य बनाने के लिए पहला कदम

छोटे कदमों से ही सही मगर संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. पोलिश सरकार ने घोषणा की है कि पीआईएस सरकार के उस फैसले को उलट दिया जाएगा जिसमें पोलैंड-जर्मन अल्पसंख्यक श्रेणी में आने वाले बच्चों के लिए जर्मन भाषा सीखने के लिए मिलने वाले पैसे रोक दिए गए थे. घोषणा में आगे यह भी कहा गया कि इतिहास की कक्षाओं में पढ़ानमे के लिए जल्द ही एक पोलिश-जर्मन स्कूली किताब को मंजूरी दी जाएगी.

लेकिन प्रवासन नीति और यूरोपीय संघ मे सुधार पर चर्चा करने के लिए अभी भी बहुत कुछ बाकी है. फिर बात आती है द्वितीय विश्व युद्ध के पोलिश पीड़ितों के मुआवजे की, जो पोलिश-जर्मन संबंधों पर तलवार की तरह लटकी हुई है.

जरुरी नहीं कि 1990 के दशक जैसे पोलिश-जर्मन "कम्युनिटी ऑफ डेस्टिनी" जैसे रिश्ते फिर से वापस लौटें. फिर भी वारसॉ में नई सरकार को पता है कि उसे अमेरिका में परेशानी हो सकती है जहां ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी यूक्रेन के लिए सहायता रोक रही है. इसके अलावा रूस की बढ़ती आक्रामकता को देखते हुए कहीं न कहीं पोलैंड को लग रहा है कि उसका सबसे अच्छा विकल्प फिलहाल बर्लिन और पेरिस के साथ नजदीकी में ही है.

(The above story first appeared on LatestLY on Feb 13, 2024 09:50 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).