विदेश

जर्मनी में घटती आबादी का असर स्कूलों पर

जर्मनी में घटती जन्मदर का असर अब स्कूलों और डे-केयर सेंटरों तक पहुंचने लगा है.

जर्मनी में घटती आबादी का असर स्कूलों पर
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

जर्मनी में घटती जन्मदर का असर अब स्कूलों और डे-केयर सेंटरों तक पहुंचने लगा है. 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बने डे-केयर सेंटरों में बच्चों की संख्या पूरे देश में पहली बार कम हुई है.सोमवार को शिक्षा पर सरकार की ओर से जारी एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. 2027/28 के शैक्षणिक वर्ष से देश के प्राथमिक स्कूलों में भी बच्चों की संख्या घटने की शुरुआत होने की आशंका है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी एक वजह आप्रवासन में कमी होना भी है. शिक्षा मंत्रालय की ओर से यह रिपोर्ट हर दो साल पर जारी होती है. इसी रिपोर्ट में ये सारी बातें कही गई हैं.

छात्र घटे लेकिन शिक्षा तंत्र अब भी दबाव में

दिलचस्प यह है कि किंडरगार्टेन में छात्रों की संख्या घटने का यह मतलब नहीं है कि जर्मन शिक्षा तंत्र पर से दबाव कम हो रहा है. जर्मन शिक्षा तंत्र स्टाफ की कमी, कमजोर होते बुनियादी ढांचे और फंड की कमी से जूझ रहा है, जिसकी एक अलग कहानी है.

एजुकेशन इन जर्मनी 2026 नाम से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है, "चाइल्ड केयर सुविधाओं में अब भी कमी है खासतौर पर 3 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए." बर्लिन में जारी की गई इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्कूलों में छात्रों की संख्या का कम होना "काम घटने से सीधे तौर पर अपने आप नहीं जुड़ा है."

जर्मनी के सभी प्राथमिक स्कूल के छात्रों के लिए पूरे दिन की केयर का इंतजाम लागू करने की प्रक्रिया चल रही है. रिपोर्ट में कहा गया है, "संसाधनों की मांग बढ़ रही है." बहुत से प्राइमरी स्कूलों ने हाल ही में सभी छात्रों को पूरे दिन के लिए केयर देने की शुरुआत की है. महिलाओं समेत बहुत से अभिभावक इससे पहले दोपहर में बच्चों की देखभाल करने की वजह से नौकरी को पार्टटाइम करने के लिए मजबूर होते थे. रिपोर्ट में कहा गया है "पूरे दिन डेकेयर की मां बाप की मांग अब भी लगातार काफी ज्यादा है और यह पूरी नहीं हो पा रही है."

जर्मनी की आबादी

बीते कुछ सालों में जर्मनी की आबादी नहीं बढ़ रही है. 2025 से पहले के सालों में दो दशकों तक आबादी में प्रति वर्ष 0.01 फीसदी की औसत से बढ़ोतरी हुई. हालांकि 2025 में आबादी में आई मामूली कमी ने इस बढ़ोतरी को बराबर कर दिया. बीते कई सालों से जर्मनी में लगातार प्रवासियों के आने से यहां की आबादी को सहारा मिल रहा था.

2023 में जर्मनी में 6 लाख से ज्यादा प्रवासी आए. हालांकि उसके बाद के सालों में इनकी संख्या भी घटी है जिसका असर देश की आबादी पर पड़ा. जर्मनी की अबादी फिलहाल स्थिर है. हालांकि मृत्युदर और जन्मदर में भारी अंतर की वजह से इसके सिकुड़ने की आशंका प्रबल है. हर साल यहां मरने वालों की संख्या करीब 10 लाख है जबकि पैदा होने वाले बच्चों की संख्या केवल 650,000. इसके साथ ही देश की आबादी में बुजुर्गों की हिस्सेदारी बढ़ रही है और कामकाजी लोगों की हिस्सेदारी घट रही है.

कौशल कमजोर पड़ा, पृष्ठभूमि का असर बढ़ा

पहली बार ये रिपोर्ट 20 साल पहले जारी की गई थी. इसका मकसद किंडरगार्टेन से लेकर यूनवर्सिटियों में जर्मन शिक्षा तंत्र का जायजा लेना है. इसके साथ ही देश में शिक्षा नीति के लिए जिम्मेदार16 राज्यों और केंद्र सरकार को सुझाव और निर्देश देना भी इस रिपोर्ट के उद्देश्यों में शामिल है.

इस साल की रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि पढ़ाई, गणित और विज्ञान में कुल मिला कर कौशल घट रहा है और शैक्षणिक सफलता बच्चे की सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि पर निर्भर है. इन दो पहलुओं की दूसरे रिसर्चों से भी पुष्टि हुई है. लाइबनित्स इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन इन एजुकेशन के काई मात्स रिपोर्ट के सह लेखक हैं उनका कहना है, "बहुत सारे युवा बुनियादी क्षमता के लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम हो जा रहे हैं." उनका कहना है कि यह रुझान "दीर्घकालीन संरचनात्मक समस्याओं" और "शिक्षा तंत्र की एक प्रमुख कमी" को दिखाता है.

जर्मन शिक्षा मंत्री कारीन प्रीन ने भी इस बात की आलोचना की है कि शैक्षणिक सफलता मुख्य रूप से सामाजिक आर्थिक कारकों पर निर्भर है. इसमें गरीबी और आप्रवासन भी शामिल है. रिपोर्ट जारी होने से पहले उन्होने सरकारी प्रसारक एआरडी से बातचीत में कहा, "हम देख रहे हैं कि शैक्षणिक कमी जन्म से ही शुरू हो जा रही है और छह साल की उम्र आते-आते बढ़ जा रही और आगे भी यह कम होती नहीं दिखी है."

प्रीन ने इस बात पर जोर दिया कि बचपन की शिक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है. किंडरगार्टेन में 6 साल की उम्र तक बच्चों को बेहतर ढंग से तैयार करने की जरूरत है जिसमें उन्हें जर्मन भाषा में दक्ष बनाना भी शामिल है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 16, 2026 05:30 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).