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सऊदी अरब की महिलाओं को मिला ड्राइविंग का अधिकार, निकाह की शर्तों में शामिल करा रही हैं कार रखने और उसके चलाने का अधिकार

सऊदी अरब की महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति जरूर मिली पर इस अधिकार के उपयोग में कभी कोई रोड़ा ना आए इसलिए महिलाओं ने कार रखने और उसके चलाने के अधिकार को अपने निकाह की शर्तों में शामिल करा रही हैं..

सऊदी अरब की महिलाओं को मिला ड्राइविंग का अधिकार, निकाह की शर्तों में शामिल करा रही हैं कार रखने और उसके चलाने का अधिकार
ड्राइविंग (Photo Credits : Pixaby)

दम्मम : सऊदी अरब ने कानूनी तौर पर भले ही महिलाओं को गाड़ी चलाने की अनुमति जरूर दे दी है लेकिन इस अधिकार के उपयोग में कभी कोई रोड़ा ना अटकाए यह सुनिश्चित करने के लिए महिलाएं कार रखने और उसके चलाने के अधिकार को अपने निकाह की शर्तों में शामिल करा रही हैं.

दम्मम के रहने वाले सेल्समैन माजद ने हाल ही में अपने निकाह की शर्तों के बारे में बातचीत करते हुए बताया कि कैसे उनकी मंगेतर ने शर्त रखी है कि वह कभी उसे गाड़ी चलाने से नहीं रोकेंगे.

दरअसल सऊदी अरब में निकाह की शर्तों का इस्तेमाल महिलाएं और पुरूष दोनों, लेकिन खास तौर से महिलाएं अपने कुछ खास अधिकारों को सुरक्षित कराने के लिए करती हैं. पितृसत्तात्मक सऊदी अरब में महिलाओं को सामान्य तौर पर अपने पुरूष अभिभावक (पति, पिता या अन्य) की सभी बातें मानने के लिए मजबूर होना पड़ता है और वह कानून की शरण में भी नहीं जा सकती हैं.

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लेकिन, पुरूष यदि निकाहनामे में लिखी किसी शर्त का उल्लंघन करता है तो महिलाएं इस आधार पर उससे तलाक ले सकती हैं. अभी तक महिलाएं निकाहनामे का इस्तेमाल अपने लिए मकान, घरेलू सहायिका रखने, आगे पढ़ाई जारी रखने या शादी के बाद भी नौकरी करते रहने जैसी शर्तें रखने के लिए करती थीं. लेकिन अब ड्राइविंग का अधिकार भी इसमें जुड़ रहा है.

माजद (29) बताते हैं कि अगले महीने उनकी शादी होने वाली है. उनकी 21 वर्षीय मंगेतर ने दो शर्तें रखी हैं.. एक वह शादी के बाद भी काम करेंगी और दूसरा कि उन्हें वाहन चलाने का अधिकार होगा.

माजद कहते हैं कि वह (मंगेतर) स्वतंत्र रहना चाहती है. मैंने इसपर कहा, ‘‘हां, क्यों नहीं.’’ माजद अपना पूरा नाम साझा नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि निकाहनामा और उसकी शर्तें निहायत निजी और पारिवारिक मामला है.

रियाद में निकाह पढ़ाने वाले एक मौलवी अब्दुलमोसेन अल-अजेमी का कहना है, ‘‘निकाह में किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए कुछ महिलाएं ड्राइविंग के अधिकार को निकाहमाने में शामिल करा रही हैं.’’ अल-अजेमी के पास हाल ही में ऐसा पहला निकाहनामा आया है. उनका कहना है कि निकाहनामा एक तरह से सुनिश्वित करता है कि शौहर अपने वादे को नहीं भूलेगा, क्योंकि यह वादा खिलाफ तलाक का आधार बन सकती है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 24, 2019 11:58 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).