Pakistan Petrol-Diesel Price Hike: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच पाकिस्तान में महंगाई का बड़ा झटका, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल, जानें नए रेट

पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान संघर्ष के चलते पेट्रोल-डीजल के दामों में ऐतिहासिक वृद्धि की है. नई दरें 3 अप्रैल 2026 से लागू हो गई हैं.

(Credit-Wikimedia commons)

Pakistan Petro Price Hike:  ईरान-इजराइल युद्ध बीच पाकिस्तान की जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है. शहबाज शरीफ सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि की घोषणा की है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. यह एक महीने के भीतर तेल के दामों में की गई दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है.

नई कीमतें और वृद्धि का विवरण

गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात (3 अप्रैल 2026) से लागू हुई नई दरों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के दाम अब ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए हैं. सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 137.24 रुपये और डीजल में 184.49 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है.  यह भी पढ़े: Pakistan Petrol-Diesel Price Hike: मिडिल ईस्ट युद्ध का असर, पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल 55 रुपये प्रति लीटर हुआ महंगा, जानें नए रेट्स

ईंधन का प्रकार नई कीमत (PKR/लीटर) वृद्धि (PKR/लीटर)
पेट्रोल 458.40 137.24
डीजल 520.35 184.49
मिट्टी का तेल (Kerosene) 457.80 34.08

अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर

पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन बढ़ती कीमतों की पुष्टि की. उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की आपूर्ति बाधित हुई है. विशेष रूप से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) से होने वाली सप्लाई रुकने के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बेकाबू हो गई हैं.

मंत्री मलिक के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय समझौतों और वित्तीय बाधाओं के कारण सरकार के पास इन कीमतों को बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.

आम जनता और किसानों के लिए राहत के उपाय

भारी वृद्धि के बीच सरकार ने कुछ लक्षित सब्सिडी (Subsidy) की भी घोषणा की है:

पाक में तेल की कीमतों में दूसरी बड़ी वृद्धि

पाकिस्तान में महंगाई दर पहले ही 17 महीने के उच्चतम स्तर (7.3%) पर है. फरवरी के अंत में शुरू हुए क्षेत्रीय तनाव के बाद से यह तेल की कीमतों में दूसरी बड़ी वृद्धि है. इससे पहले मार्च की शुरुआत में भी कीमतों में 55 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में इस भारी उछाल से आने वाले दिनों में परिवहन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी आ सकती है.

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