LIVE: रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका दे सकता है यूक्रेन का साथ

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर जेलेंस्की से कहा कि आगे चलकर यूक्रेन को पर्याप्त सुरक्षा गारंटी मिलेगी.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने व्लादिमीर जेलेंस्की से कहा कि आगे चलकर यूक्रेन को पर्याप्त सुरक्षा गारंटी मिलेगी. हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि बदले में यूक्रेन से क्या उन्हें क्या मिलेगा.- हमास ने इस्राएल के साथ युद्ध विराम और बंधकों की रिहाई के प्रस्ताव को स्वीकार किया

- राहुल गांधी ने कहा, मौजूदा चुनाव आयुक्तों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे

- स्वीडन में खनन के चलते पूरे चर्च को उठाकर दूसरे शहर पहुंचाया जा रहा

- चीनी विदेश मंत्री ने एनएसए डोभाल और जयशंकर से की मुलाकात

- रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका दे सकता है यूक्रेन का साथ

नॉर्वे: क्राउन के बेटे पर बलात्कार सहित 32 मामलों में मुकदमा दायर

नॉर्वे के अभियोजकों ने सोमवार को घोषणा की कि उन्होंने लंबी जांच के बाद क्राउन प्रिंसेस मेत्ते-मारे के सबसे बड़े बेटे मारियुस बोर्ग होइबी पर करीब 32 गंभीर आरोपों में मुकदमा दायर किया है.

नॉर्वे मीडिया के अनुसार, ओस्लो के सरकारी वकील स्टुर्ला हेनरिक्सबो ने कहा है कि अगर होइबी दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 10 साल तक की जेल हो सकती है. होइबी पर लगभग तीन दर्जन आरोप लगाए गए हैं, जिनमें बलात्कार और दुर्व्यवहार के कई मामले शामिल हैं.

उन पर अपनी एक्स के साथ हिंसा, जान से मारने की धमकी और यातायात नियमों के उल्लंघन सहित अन्य अपराधों के भी आरोप लगाए गए हैं. होइबी के पास कोई शाही उपाधि या आधिकारिक कर्तव्य नहीं है और पिछले साल कई गिरफ्तारियों और गलत कामों के आरोपों के बाद से उन पर नॉर्वे में ही कई उंगलियां उठाई जा रही हैं.

इटली का ग्लेशियर इतना पिघला कि अब उसे मापना भी दूभर हो गया

इटली का वेंटिना ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के कारण इतनी तेजी से पिघल रहा है कि भूविज्ञानी अब उसे उस तरीके से नहीं माप पा रहे हैं जैसा पिछले 130 सालों से करते आ रहे थे. यह ग्लेशियर उत्तरी लॉम्बर्डी के सबसे बड़े ग्लेशियरों में से एक है.

इस साल गर्मी के मौसम के बाद जब वैज्ञानिक वहां पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि ग्लेशियर की हर साल पीछे हटने की रफ्तार को मापने के लिए लगाए गए साधारण खूंटे अब भूस्खलन और मलबे के नीचे दब गए हैं. इलाके की जमीन भी इतनी अस्थिर हो चुकी है कि अब वहां जाकर माप लेना मुश्किल हो गया है.

लॉम्बर्डी ग्लेशियोलॉजिकल सर्विस ने सोमवार को बताया कि अब ग्लेशियर की स्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन इमेजरी और रिमोट सेंसिंग का इस्तेमाल किया जाएगा. वैज्ञानिकों के अनुसार, 1895 में जब पहली बार मापने के लिए खूंटे लगाए गए थे, तब से अब तक वेंटिना ग्लेशियर की लंबाई 1.7 किलोमीटर कम हो चुकी है.

जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले कुछ वर्षों में ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार और बढ़ गई है. केवल पिछले 10 सालों में ही ग्लेशियर 431 मीटर पीछे जा चुका है. यह यूरोप के ग्लेशियरों पर बढ़ते वैश्विक तापमान के असर का एक और उदाहरण है, जो पर्यावरण और इंसानी जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रहा है.

हमास ने इस्राएल के साथ युद्ध विराम और बंधकों की रिहाई के प्रस्ताव को स्वीकार किया

हमास ने इस्राएल के साथ 60 दिन के संघर्षविराम (सीजफायर) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस समझौते में गाजा में बंदी बनाए गए आधे बंधकों को छोड़ना और इसके बदले इस्राएल द्वारा कुछ फलीस्तीनी कैदियों को रिहा करना शामिल है. यह जानकारी समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से आ रही है, जिसे कथित तौर पर सोमवार को मिस्र के एक अधिकारी ने यह बात बताई.

हमास के वरिष्ठ नेता बासेम नईम ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर इस फैसले की पुष्टि की. हमास ने कहा कि अन्य फलीस्तीनी गुटों ने भी मध्यस्थों को अपनी सहमति दे दी है. फिलहाल इस्राएल ने इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि प्रस्ताव उन्हें मिला है. इस बातचीत में मिस्र, कतर और साथ ही अमेरिका भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.

रॉयटर्स के अनुसार, इस्राएल की गाजा सिटी पर कब्जे की योजना ने विदेशों और इस्राएल के भीतर भी चिंता बढ़ा दी है. रविवार को इस्राएल में हजारों लोगों ने युद्ध शुरू होने के बाद की सबसे बड़ी रैलियों में से एक रैली निकाली और मांग की कि लड़ाई खत्म हो और गाजा में बचे हुए 50 बंधकों को भी छुड़वाया जाए. अधिकारियों का मानना है कि उनमें से लगभग 20 अभी जिंदा हैं.

इस बीच, गाजा सिटी के पूर्वी इलाकों में रहने वाले हजारों फलीस्तीनी लगातार हो रही इस्राएली कार्रवाई से अपने घर छोड़कर पश्चिम और दक्षिण की ओर भाग रहे हैं.

ओपनएआई ने भारत के लिए पेश किया चैटजीपीटी का सबसे सस्ता प्लान

ओपनएआई ने मंगलवार को भारतीय यूजर्स के लिए 'चैटजीपीटी गो' लॉन्च किया. इसके सब्सक्रिप्शन के लिए हर महीने 399 रुपये चुकाने होंगे. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, यह चैटजीपीटीका अब तक का सबसे सस्ता प्लान है. भारत ओपनएआई के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार है इसलिए यहां अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए कंपनी ने यह कदम उठाया है.

इस प्लान के तहत यूजर्स फ्री वर्जन की तुलना में दस गुना अधिक मैसेज भेज सकेंगे और दस गुना अधिक तस्वीरें बनवा सकेंगे. इसके अलावा, चैटजीपीटी के जवाब देने का समय भी कम होगा. एआई कंपनी ने अपने बयान में कहा कि 'चैटजीपीटी गो' उन भारतीयों के लिए बनाया गया है जो अधिक किफायती मूल्य पर चैटजीपीटी की उन्नत क्षमताओं तक बेहतर पहुंच चाहते हैं.

चैटजीपीटी के सबसे उन्नत वर्जन- 'चैटजीपीटी प्रो' के लिए भारत में हर महीने 19,900 रुपये देने होते हैं. वहीं, चैटजीपीटी प्लस के लिए हर महीने 1,999 रुपये चुकाने होते हैं. ऐसे में इस सस्ते प्लान के जरिए चैटजीपीटी ऐसे भारतीय यूजर्स की संख्या बढ़ाना चाहता है, जो उसे भुगतान करते हैं.

राहुल गांधी ने कहा, मौजूदा चुनाव आयुक्तों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिहार में "वोट चोरी" के मुद्दे पर वोट अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं. मंगलवार, 19 अगस्त को उनकी यात्रा का तीसरा दिन है. आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी इस यात्रा में राहुल गांधी का साथ दे रहे हैं. यात्रा के दूसरे दिन राहुल ने कथित वोट चोरी के मुद्दे पर चुनाव आयोग को सीधी चेतावनी दी.

उन्होंने बिहार के गया जिले में लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “एक दिन ऐसा आएगा, जब बिहार में और दिल्ली में इंडिया गठबंधन की सरकार होगी, फिर हम आप तीनों (मौजूदा चुनाव आयुक्तों) के खिलाफ कार्रवाई करेंगे…चुनाव आयुक्त, आप अच्छी तरह समझ लीजिए, अगर आपने अपना काम नहीं किया तो आप पर सख्त कार्रवाई होने जा रही है.”

राहुल ने कहा कि चोरी चुनाव आयोग की पकड़ी गई है और वे हलफनामा मुझसे मांग रहे हैं. उन्होंने चुनाव आयोग से कहा, “थोड़ा सा समय दे दो. हर राज्य में, हर विधानसभा में, हर लोकसभा में हम आपकी चोरी पकड़कर देश को दिखाने जा रहे हैं.” राहुल ने कहा कि बिहार में एसआईआर के जरिए वोट चोरी की कोशिश की जा रही है लेकिन बिहार की जनता ऐसा नहीं होने देगी.

स्वीडन में खनन के चलते पूरे चर्च को उठाकर दूसरे शहर पहुंचाया जा रहा

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, स्वीडन का मशहूर किरुना चर्च मंगलवार से दो दिन की यात्रा पर निकलेगा. भले ही यह सुनने में अजीब लग रहा हो लेकिन यह चर्च वाकई में एक जगह से दूसरी जगह, पूरी बिल्डिंग समेत उठाकर रखा जा रहा है. इसे धीरे-धीरे एक नई जगह ले जाया जा रहा है ताकि इसकी लकड़ी की दीवारें जमीन धंसने और वहां की बड़ी लौह अयस्क खदान के फैलाव से बच सकें.

करीब 600 टन भारी और 113 साल पुराने इस चर्च को श्रमिकों ने नींव से उठाकर एक बड़े ट्रेलर पर रखा. दरअसल, उस जगह पर पिछले कई सालों से एक बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसके तहत पूरे शहर के हजारों लोग और कई इमारतें नई जगह शिफ्ट की जा रही हैं.

खनन कंपनी एलकेएबी ने इस काम के लिए सड़क भी चौड़ी करवाई है. अब लाल रंग का यह चर्च, जिसे स्वीडन की सबसे खूबसूरत लकड़ी की इमारतों में गिना जाता है, लगभग 5 किलोमीटर दूर नए किरुना शहर के बीचों-बीच पहुंचाया जाएगा.

चीनी विदेश मंत्री ने एनएसए डोभाल और जयशंकर से की मुलाकात

चीन के विदेश मंत्री वांग यी 18-19 अगस्त को भारत के दौरे पर हैं. मंगलवार को उन्होंने दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एनएसए अजीत डोभाल से मुलाकात की. वांग यी भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की 24वें दौर की वार्ता में भी शामिल होंगे. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, वांग यी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे.

दौरे के पहले दिन, सोमवार को वांग यी ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ वार्ता की. जयशंकर ने मुलाकात के बाद एक्स पर लिखा, “हमारे आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों, तीर्थयात्राओं, लोगों के बीच संपर्क, नदियों का डेटा साझा करने पर, सीमा व्यापार, जुड़ाव और द्विपक्षीय आदान-प्रदान पर जरूरी बातचीत हुई.”

जयशंकर ने लिखा, “हम अपने संबंधों के कठिन दौर से आगे बढ़ना चाहते हैं, इसलिए इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की जरूरत है…मुझे विश्वास है कि आज की हमारी चर्चाएं भारत और चीन के बीच एक स्थिर, सहयोगात्मक और प्रगतिशील संबंध के निर्माण में योगदान देंगी.”

चीन के आधिकारिक बयान के मुताबिक, वांग यी ने कहा कि चीन और भारत को "सही रणनीतिक समझ” विकसित करनी चाहिए और “एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी या खतरे के रूप में नहीं, बल्कि साझेदार और अवसर के रूप में देखना चाहिए.” उन्होंने दोनों देशों से अपील की कि वे साथ आकर दूसरे विकासशील देशों के लिए एकजुटता का उदाहरण स्थापित करें.

रूस-यूक्रेन युद्ध में अमेरिका दे सकता है यूक्रेन का साथ

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का स्वागत करते हुए कहा, "काफी प्रगति हो रही है." उन्होंने पहली बार कहा कि अमेरिका यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी के लिए आगे आ सकता है.

सोमवार को अमेरिका के ओवल ऑफिस में हुई ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात से लोगों और खासकर कि यूरोपीय संघ को काफी उम्मीदें हैं. पिछली बार ट्रंप और जेलेंस्की के बीच हुई मुलाकात के दृश्य सभी को याद हैं. उस हिसाब से इस बार की मुलाकात सकारात्मक नजर आई.

ट्रंप ने कहा, “यूरोप (रूस के खिलाफ) डिफेंस की पहली लाइन है.” उन्होंने आगे कहा, "लेकिन हम मदद करेंगे, हम इसमें शामिल होंगे.” उन्होंने यूक्रेन में जमीनी स्तर पर अमेरिकी शांति सैनिकों की तैनाती के विचार को भी खारिज नहीं किया.

ट्रंप और जेलेंस्की की द्विपक्षीय बैठक समाप्त होने के बाद, उनके साथ सात यूरोपीय नेता भी शामिल हुए, जो जेलेंस्की के साथ वॉशिंगटन आए थे ताकि यूक्रेन और अमेरिकी राष्ट्रपति के शांति समझौते के प्रयासों के लिए यूरोप का एकजुट समर्थन भी लोगों को दिख सके.

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