UNSC सुधारों पर भारत का कड़ा रुख: सुरक्षा परिषद में 'तीसरी श्रेणी' की सदस्यता का प्रस्ताव ठुकराया, बताया सुधारों को टालने की साजिश
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 'तीसरी श्रेणी' की सदस्यता के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह स्थायी सदस्यता के विस्तार को रोकने और वास्तविक सुधारों में देरी करने की एक सोची-समझी कोशिश है.
संयुक्त राष्ट्र (यूएन): भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के ढांचे में सुधार के लिए प्रस्तावित 'तीसरी श्रेणी' (Third Category) की सदस्यता को पूरी तरह खारिज कर दिया है. शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को न्यूयॉर्क (New York) में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत ने कहा कि इस तरह के 'हाइब्रिड मॉडल' (Hybrid Model) केवल मुख्य सुधारों को दशकों तक टालने और संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता को खत्म करने की एक साजिश हैं. भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल (Yojna Patel) ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी, केवल इन दो श्रेणियों का विस्तार ही सार्थक सुधार का एकमात्र रास्ता है. यह भी पढ़ें: India AI Impact Summit 2026 Final Day: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जारी की विशेष एडवाइजरी, भारत मंडपम के आसपास इन रास्तों पर रहेगी पाबंदी
क्या है 'तीसरी श्रेणी' का प्रस्ताव?
'तीसरी श्रेणी' या 'फिक्स्ड रीजनल सीट्स' का प्रस्ताव मुख्य रूप से 'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' (UfC) समूह द्वारा दिया गया है, जिसका नेतृत्व इटली कर रहा है और पाकिस्तान इसका सदस्य है। इस प्रस्ताव के तहत देशों को लंबी अवधि के लिए सदस्यता देने और फिर से चुने जाने की पात्रता देने की बात कही गई है, लेकिन इन्हें स्थायी सदस्य का दर्जा नहीं मिलेगा.
भारत ने इस प्रस्ताव को 'रेड हेरिंग' (ध्यान भटकाने वाला) करार दिया है. योजना पटेल ने कहा कि कुछ देशों के निहित स्वार्थों के कारण इस प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बनाया जा रहा है ताकि संयुक्त राष्ट्र दशकों पुराने संकट में ही फंसा रहे.
G4 और L.69 समूहों का मिला समर्थन
जापान के स्थायी प्रतिनिधि यामाजाकी काज़ुयुकी ने G4 समूह (भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील) की ओर से बोलते हुए कहा कि प्रस्तावित सीटें वर्तमान अस्थायी सीटों से अलग नहीं हैं. चूंकि इनमें निरंतरता सुनिश्चित नहीं है, इसलिए यह स्थायी सीटों का विकल्प नहीं हो सकतीं.
इसी तरह, L.69 समूह (42 विकासशील देशों का समूह) की ओर से सेंट लूसिया की प्रतिनिधि मेनिसा रामबली ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ ने 80 साल का इंतजार सिर्फ इसलिए नहीं किया है कि वह सुधारों के नाम पर किसी 'सांत्वना पुरस्कार' या हाइब्रिड फार्मूले को स्वीकार कर ले.’ यह भी पढ़ें: India AI Impact Summit 2026: पीएम मोदी ने स्टार्टअप्स को दिया 'मातृभाषा' का मंत्र, एथिकल टेक्नोलॉजी और स्वदेशी समाधानों पर दिया जोर
एशिया और अफ्रीका का प्रतिनिधित्व है अनिवार्य
भारत ने सुरक्षा परिषद में एशिया-प्रशांत, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका-कैरिबियन समूहों के कम प्रतिनिधित्व या गैर-प्रतिनिधित्व को सुधारों के केंद्र में रखा है. योजना पटेल ने जोर देकर कहा कि किसी भी सुधार को तब तक अधूरा और अन्यायपूर्ण माना जाएगा जब तक कि स्थायी श्रेणी का विस्तार नहीं होता.
वीटो और कार्यप्रणाली पर स्पष्टीकरण
भारत ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि क्षेत्रीय सीटों वाले देशों को 'वीटो' का अधिकार दिया जाए. पटेल ने कहा कि बिना किसी स्पष्टता के वीटो देना चर्चा को और अधिक उलझाने जैसा है. उन्होंने तर्क दिया कि स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ने से परिषद के कामकाज में कोई बाधा नहीं आएगी, बल्कि परिषद की कार्यप्रणाली को नई जरूरतों के अनुसार बदला और बेहतर बनाया जा सकता है.