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बांग्लादेश में अज्ञात शवों की पहचान के लिए सामूहिक कब्र की खुदाई

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, पिछले साल बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई में करीब 1,400 लोग मारे गए.

बांग्लादेश में अज्ञात शवों की पहचान के लिए सामूहिक कब्र की खुदाई
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, पिछले साल बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई में करीब 1,400 लोग मारे गए. अज्ञात शवों की पहचान के लिए ढाका के एक सामूहिक कब्र को खोदा जा रहा है.बांग्लादेश की पुलिस ने राजधानी ढाका के रायरबाजार इलाके में एक सामूहिक कब्र की खुदाई शुरू की है. खबरों के मुताबिक, आशंका है कि इस कब्र में 114 अज्ञात शव दबे हैं, जिन्हें कथित तौर पर पिछले साल जुलाई-अगस्त में विद्रोह के दौरान मारा गया था.

सीआईडी के प्रमुख मुहम्मद सिबगतउल्लाह ने मीडिया को बताया कि सामूहिक कब्र में करीब 114 शव होने का अनुमान है, मगर सही संख्या खुदाई पूरी होने के बाद ही पता चलेगी. प्रशासन ने बताया कि कब्र से निकाले गए शवों की पहचान के बाद उनकी धार्मिक मान्यता और परिवार की इच्छा के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.

जुलाई-अगस्त 2024 में शवों को दफनाया गया था

इस अभियान को संयुक्त राष्ट्र का समर्थन हासिल है. यह काम अर्जेंटीना के फॉरेंसिक एंथ्रोपॉलजिस्ट लुइस फौंदेब्रीदर की देखरेख में हो रहा है. सामूहिक कब्रों से शवों को निकालकर उनकी पहचान करने के कई अभियानों का वह नेतृत्व कर चुके हैं.

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समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, 'अंजुमन मुफीदुल इस्लाम' नाम के एक स्वयंसेवक समूह ने रायरबाजार कब्रिस्तान में इन शवों को दफनाया था. समूह का कहना है कि उसने जुलाई 2024 में 80 और अगस्त 2024 में 34 लावारिस शवों को यहां दफनाया था. ये सभी लोग कथित तौर पर बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान मारे गए थे.

यूएन का कहना है कि प्रदर्शनों के दौरान की गई कार्रवाई में मारे गए लोगों की संख्या 1,400 हो सकती है. पिछले महीने मानवता के खिलाफ अपराध के जिस मुकदमे में शेख हसीना को सजा सुनाई गई, उनमें ये मौतें भी शामिल हैं.

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"हमने हर जगह उसे तलाश किया"

प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा के बाद से अब तक कई लोग लापता हैं. परिवारवाले आज भी जवाब खोज रहे हैं. इनमें से ही एक हैं मुहम्मद नबील, जिन्हें अपने भाई सोहेल राणा के अवशेष की तलाश है. 28 बरस के सोहेन जुलाई 2024 में लापता हो गए.

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नाबिल ने एएफपी को बताया, "हमने हर जगह उसे तलाश किया." नबील ने बताया कि एक फेसबुक वीडियो देखकर उन्हें पहली बार यह शंका हुई कि सोहेल मर चुका है. फिर अज्ञात शवों को दफ्न करने वाले स्वयंसेवकों की खींची एक तस्वीर में नीली टीशर्ट और काली पैंट देखकर उन्होंने अपने भाई के कपड़ों की पहचान की.

स्थानीय मीडिया के अनुसार, अब तक 10 परिवार पहचान के लिए आवेदन कर चुके हैं.

सामूहिक कब्र से शवों को निकालकर उनका पोस्टमॉर्टम और डीएनए जांच की जाएगी. इस प्रक्रिया में कई हफ्ते लग सकते हैं. इस काम का तकनीकी ब्योरा देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अबू तालेब ने बताया, "एक साल से ज्यादा वक्त हो चुका है, ऐसे में सॉफ्ट टिशू से डीएनए लेना मुमकिन नहीं होगा. हड्डियों की मदद से इस काम में समय लगेगा."

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ढाका के चार मेडिकल कॉलेजों के फॉरेंसिक एक्सपर्ट टीम का हिस्सा हैं. यूएन के साथ हुए सहयोग के तहत लुइस फौंदेब्रीदर को भी मदद के लिए बुलाया गया है. उन्होंने पत्रकारों से कहा, "यह प्रक्रिया जटिल और अनूठी है. हम सुनिश्चित करेंगे कि अंतरराष्ट्रीय मापदंडों का पालन किया जाए."

फौंदेब्रीदर, साल 1984 में गठित अर्जेंटीना फॉरेंसिक एंथ्रोपॉलजी टीम का नेतृत्व कर चुके हैं. 1970-80 के दशक में सैन्य तानाशाही के दौरान गायब हुए हजारों लोगों के मामलों की जांच के लिए यह टीम बनाई गई थी.

(The above story first appeared on LatestLY on Dec 09, 2025 12:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).