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अमेरिका और चीन में बनी सहमति, बड़े व्यापार युद्ध का खतरा टला

अमेरिका और चीन के बीच करीब तीन दिनों तक चली लंबी व्यापार बातचीत के बाद, दोनों ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में आपसी व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर सहमति बन गई है.

अमेरिका और चीन में बनी सहमति, बड़े व्यापार युद्ध का खतरा टला
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अमेरिका और चीन के बीच करीब तीन दिनों तक चली लंबी व्यापार बातचीत के बाद, दोनों ही बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में आपसी व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर सहमति बन गई है.लंदन में दो दिन चली मैराथन बातचीत के बाद अमेरिका और चीन आपसी व्यापार के एक फ्रेमवर्क पर सहमत हो गए हैं. इसके साथ ही दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार युद्ध का खतरा टलता नजर आ रहा है. इस व्यापार युद्ध बढ़ने से दुनिया में महंगाई और आर्थिक जड़ता का दौर आने का संकट खड़ा हो सकता था.

इस फ्रेमवर्क पर सहमति बनाने के लिए दोनों देशों ने दो दौर में बातचीत की. पहले दौर की बातचीत स्विट्जरलैंड के जेनेवा में पिछले महीने हुई थी. इसके बाद भी दो प्रमुख मुद्दों पर तनाव बना हुआ था. अमेरिका चाहता था कि चीन, अमेरिका को दुर्लभ खनिज दे. वहीं चीन चाहता था कि अमेरिका, से चीन आने वाली एडवांस टेक्नोलॉजी पर रोक ना लगे.

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डॉनल्ड ट्रंप ने फिर से अमेरिका में सत्ता में आने के बाद चीन पर बड़े व्यापार प्रतिबंध लगाए थे. इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते बेहद खराब दौर में पहुंच गए. चीन और अमेरिका दोनों ने ही एक-दूसरे पर भारी आयात शुल्क लगा दिए. नतीजतन साल 2020 के बाद से मई से पहले 12 महीनों में अमेरिका को होने वाले चीनी निर्यात में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई थी.

दुर्लभ खनिज और टेक्नोलॉजी निर्यात क्यों अहम?

हालिया बातचीत का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि चीन, अमेरिका को दुर्लभ खनिजों का निर्यात और अमेरिका की ओर से चीन को टेक्नोलॉजी देने पर प्रतिबंध, दोनों पक्षों के दूसरे व्यापार बातचीत को मुश्किल में नहीं डालेंगे. अमेरिका और चीन की बातचीत में ये दो मुद्दे लंबे समय से बहुत अहम बने हुए हैं.

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दरअसल अमेरिका के लिए दुर्लभ खनिज बहुत अहम हैं. ये यहां के रक्षा, कार और टेक उद्योगों के लिए खाद-पानी हैं. दुनिया के अधिकांश दुर्लभ खनिजों की प्रॉसेसिंग अब भी चीन में ही होती है. ऐसे में दुर्लभ खनिजों के मामले में अमेरिका की ही नहीं, दुनिया के ज्यादातर देशों की चीन पर भारी निर्भरता है.

चीन और अमेरिका के खराब होते संबंधों के बीच अमेरिका ने दुर्लभ खनिज हासिल करने के लिए चीन का विकल्प तलाशने शुरू किए हैं. हालांकि इन विकल्पों की ओर से पर्याप्त दुर्लभ खनिज मिल पाने में अभी दशकों का समय लगेगा. तब तक अमेरिका को इनके लिए चीन पर निर्भर रहना पड़ेगा.

उधर चीन चाहता है कि अमेरिका उन प्रतिबंधों को हटा ले, जो उसने चीन को एडवांस टेक्नोलॉजी के निर्यात पर लगा रखे हैं. विवाद का नया विषय बना था, अमेरिका की ओर से चीनी कंपनियों को चिप डिजाइन सॉफ्टवेयर के निर्यात पर लगाई गई रोक.

अमेरिका ने दुनिया भर में हुआवे के चिप के इस्तेमाल को लेकर नई चेतावनियां भी जारी की थीं. चीन ने इस पर भी विरोध जताया था. इसके अलावा अमेरिका में चीनी छात्रों का वीजा रद्द किया जाना भी बातचीत का एक अहम मुद्दा था.

आखिर चीन को छूट देने पर मान गए ट्रंप

इसी सोमवार को व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने संकेत दिया था कि अगर चीन अमेरिका को दुर्लभ खनिजों के निर्यात में तेजी लाता है तो डॉनल्ड ट्रंप, चीन को चिप्स के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में छूट दे सकते हैं.

हालांकि यह कदम पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीति में बड़ा बदलाव होगा. बाइडेन का मानना था कि चीन, अमेरिका से मिली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल अपनी सेना को मजबूत बनाने के लिए कर सकता है. अब अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक ने लंदन से अमेरिका रवाना होने से पहले बताया कि चीन और अमेरिका के बीच जिस हालिया फ्रेमवर्क पर सहमति बनी है, उससे दुर्लभ खनिजों और मैग्नेट के मुद्दे का हल हो जाएगा. उन्होंने अमेरिका की ओर से टेक्नोलॉजी निर्यात पर लगी रोक में छूट देने के भी संकेत दिए.

ट्रंप और जिनपिंग ने फोन पर भी की थी बात

लंदन में मंगलवार को पूरी हुई बातचीत में हिस्सा लेने के लिए खुद अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक भी पहुंचे थे. अब वह अमेरिका वापस लौटकर, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को बैठक में बनी सहमति के बारे में बताएंगे. जिस फ्रेमवर्क पर अमेरिका और चीन में सहमति बनी है, उसके सभी मुद्दों की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है.

बातचीत से कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने फोन पर बातचीत की थी. दोनों राष्ट्रपतियों ने एक-दूसरे को अपने देश आने का न्यौता भी दिया गया था. अमेरिका और चीन की इस सहमति का दुनिया भर के बाजारों पर बहुत सकारात्मक असर देखने को मिला. चीन और हांगकांग के शेयर मार्केट के सूचकांकों में करीब 1 फीसदी की बढ़त देखने को मिली.

दोनों देशों की तटस्थ जगहों पर हुई व्यापार बातचीत

आपसी व्यापार को लेकर अमेरिका और चीन की जेनेवा में हुई पहले दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामानों पर अपने टैरिफ को 115 फीसदी करने का निर्णय लिया था. इसके साथ ही व्यापार युद्ध को खत्म करने के लिए 90 दिनों की समयसीमा तय की थी. हालांकि बाद में दोनों देशों के बीच फिर से दुर्लभ खनिजों और अमेरिका के टेक्नोलॉजी निर्यात पर प्रतिबंधों को लेकर विवाद गहराने लगा था.

दोनों देशों के बीच यह सहमति ब्रिटेन के ऐतिहासिक लैंकास्टर हाउस मैंशन में बनी. यह ऐतिहासिक हवेली बकिंघम पैलेस से बस कुछ ही दूरी पर स्थित है. ब्रिटेन की सरकार ने इसे दोनों पक्षों को बातचीत की एक तटस्थ जगह के तौर पर उपलब्ध कराया था.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 11, 2025 07:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).