Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में सत्ता से बेदखल और पार्टी पर बैन के बीच शेख हसीना के लाखों समर्थक अब किधर जाएंगे? किसे होगा फायदा; जानें विशेषज्ञों की राय

बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से अवामी लीग बाहर है. विशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना के 'बेदखल' समर्थक इस बार चुनाव के नतीजों में 'किंगमेकर' की भूमिका निभा सकते हैं.

(Photo Credits ANI)

Bangladesh Election 2026:  बांग्लादेश में 12 फरवरी, 2026 को होने वाले आम चुनाव दक्षिण एशिया के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहे हैं. 15 साल तक एकछत्र राज करने वाली अवामी लीग (Awami League) इस बार न केवल सत्ता से बाहर है, बल्कि चुनावी मैदान से भी गायब है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत में निर्वासित जीवन बिता रही हैं और उनकी पार्टी पर प्रतिबंध लगा हुआ है. ऐसे में राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर उन लाखों समर्थकों पर टिकी है, जो पारंपरिक रूप से अवामी लीग के कट्टर वोटर रहे हैं.

कहां जाएगा अवामी लीग का वोट बैंक?

विशेषज्ञों और हालिया ओपिनियन पोल्स के अनुसार, अवामी लीग के समर्थकों का वोट तीन हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है: यह भी पढ़े:  Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव, शेख हसीना के बाद ‘नए युग’ की शुरुआत का इंतजार, नतीजों पर पूरी दुनिया की रहेगी नजर

  1. बीएनपी (BNP) की ओर झुकाव: एक हालिया सर्वे (The Hindu/SAU) के अनुसार, लगभग 48.2% पूर्व अवामी समर्थक कट्टरपंथी विचारधारा को रोकने के लिए 'बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी' (BNP) को वोट दे सकते हैं.

  2. जमात-ए-इस्लामी: करीब 29.9% समर्थकों का रुझान जमात और उसके 11-दलीय गठबंधन की ओर देखा जा रहा है, जो वर्तमान में सुरक्षा और स्थिरता के वादे के साथ आगे बढ़ रहा है.

  3. साइलेंट वोटर और बहिष्कार: अवामी लीग नेतृत्व ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान किया है. ऐसे में एक बड़ा हिस्सा मतदान से दूरी बना सकता है या पहली बार शुरू किए गए 'नो वोट' (No Vote) विकल्प का उपयोग कर सकता है.

विशेषज्ञों की राय

राजनीतिक विश्लेषक शाहदत शाहीन के अनुसार, अवामी लीग के समर्थकों की अनुपस्थिति एक "राजनीतिक शून्य" पैदा कर रही है.

किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?

वर्तमान परिदृश्य में बीएनपी (BNP) सबसे बड़े लाभार्थी के रूप में उभर रही है. अवामी लीग के न होने से मुकाबला त्रिकोणीय (AL vs BNP vs Jamaat) के बजाय द्विपक्षीय (BNP vs Jamaat-NCP) हो गया है.

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर

संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षक चुनावी निष्पक्षता पर नजर रखे हुए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चुनाव में मतदान का प्रतिशत (Voter Turnout) बहुत कम रहता है, तो यह नई सरकार की वैधता पर सवाल खड़े कर सकता है. शेख हसीना ने भारत से जारी अपने बयानों में इस चुनाव को "अलोकतांत्रिक" करार दिया है, जो उनके समर्थकों को और अधिक उत्तेजित कर सकता है.

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