ईरान के परमाणु कार्यक्रमों और देश में जारी हिंसक प्रदर्शनों के बीच अमेरिका ने नए टैरिफ की घोषणा की है. चीन, रूस, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश हैं जिन पर नए टैरिफ का ज्यादा असर होगा.अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 6 फरवरी को ईरान के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों पर 25% टैरिफ लगाने से जुड़े एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए. डॉनल्ड ट्रंप ने जनवरी में पहली बार ऐसा कदम उठाने की धमकी दी थी. ईरान के परमाणु कार्यक्रमों और देश में पिछले साल दिसंबर के आखिरी हफ्ते में शुरू हुए सत्ता विरोधी प्रदर्शनों को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है.
कार्यकारी आदेश में क्या हैं प्रावधान?
शनिवार से लागू हो चुके इस कार्यकारी आदेश के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन उन देशों पर नए टैरिफ लगा सकता है जो अब भी ईरान के साथ व्यापार करते हैं. इसमें कहा गया है कि "संयुक्त राज्य अमेरिका में आयात किए जाने वाले उन सामानों पर टैरिफ लगाए जा सकते हैं जो किसी भी ऐसे देश के उत्पाद हैं, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान से कोई भी सामान या सेवाएं खरीदता है, आयात या हासिल करता है."
इस कदम से ईरान के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार चीन पर बड़ा असर पड़ेगा, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी है. साथ ही रूस, जर्मनी, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात के साथ व्यापार पर भी असर पड़ेगा. वाइट हाउस ने कहा कि टैरिफ का मकसद "ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रमों, आतंकवाद के समर्थन, बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने और क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जवाबदेह ठहराना है, जो अमेरिकी सुरक्षा, सहयोगियों और हितों को खतरे में डालते हैं."
अमेरिका-ईरान वार्ता का अभी नतीजा नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को हुई परोक्ष बातचीत बिना किसी तत्काल सफलता के खत्म हो गई. लेकिन ऐसे संकेत हैं कि बातचीत जारी रहेगी. जून 2025 में ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी और इस्राएली बमबारी बाद दोनों के बातचीत की मेज पर आने का पहला मौका था. ओमान की मध्यस्थता में हुई इस वार्ता के बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे "एक अच्छी शुरुआत" बताया. उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष "बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं."
डॉनल्ड ट्रंप ने इस बातचीत को "बहुत अच्छा" बताया. ट्रंप ने ईरान के लिए कहा, "ऐसा लगता है कि वह बहुत बुरी तरह से समझौता करना चाहता है." लेकिन फिर से चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं होता है तो इसके परिणाम भुगतने होंगे. ट्रंप ने जोर दिया कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने चाहिए. एयर फोर्स वन में उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अगले हफ्ते की शुरुआत में एक और बैठक की योजना बनाई गई है.
प्रदर्शनों पर कार्रवाई के बाद संकट गहराया
ईरान के भीतर सरकार ने दिसंबर में शुरू हुए आर्थिक प्रदर्शनों पर व्यापक कार्रवाई के बीच इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया है. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट एजेंसी ने शुक्रवार को कहा कि उसने अब तक 6,505 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की पुष्टि की है. साथ ही 214 सुरक्षाकर्मी और घटनाओं के दौरान आसपास मौजूद 61 आम नागरिकों की मौत की जानकारी सामने आई है. पिछले साल जून में 12 दिनों तक चले युद्ध से पहले ईरान 60 फीसदी शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था, जो हथियार-ग्रेड मैटेरियल तैयार से सिर्फ एक छोटा तकनीकी कदम दूर है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने बताया है कि ईरान उस स्तर तक संवर्धन करने वाला एकमात्र गैर-परमाणु सशस्त्र देश है.













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