Vikram-1 Launch Today: भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' आज होगा लॉन्च, अंतरिक्ष क्षेत्र में रचेगा नया इतिहास
हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस शनिवार को अपने पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल 'विक्रम-1' को लॉन्च कर इतिहास रचने के लिए तैयार है. 'मिशन आगमन' के तहत यह प्रक्षेपण भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा.
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Orbital Rocket 'Vikram-1': भारत के तेजी से बढ़ते निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए शनिवार का दिन एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है. हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) अपने पहले ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल 'विक्रम-1' (Vikram-1) को लॉन्च करने के लिए पूरी तरह तैयार है. 'मिशन आगमन' (Mission Aagaman) के नाम से होने वाला यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) के प्रथम लॉन्च पैड से सुबह 11:30 बजे निर्धारित किया गया है.
यह परीक्षण उड़ान वैश्विक निजी ऑर्बिटल लॉन्च बाजार में भारत के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करेगी. पूरी तरह से एक निजी भारतीय कंपनी द्वारा विकसित 'विक्रम-1' देश का पहला निजी तौर पर निर्मित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जो भारत की वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
सुरक्षा और तकनीकी तैयारियां पूरी
स्काईरूट एयरोस्पेस ने लॉन्च से पहले जानकारी दी है कि इस मिशन के लिए सभी आवश्यक हवाई क्षेत्र (Airspace) और समुद्री मंजूरियां सुरक्षित कर ली गई हैं. प्राधिकारियों ने रॉकेट के उड़ान पथ और प्रभाव क्षेत्र (Impact Corridor) के साथ प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र और समुद्री क्षेत्रों को अधिसूचित कर दिया है ताकि मिशन बिना किसी बाधा के पूरा हो सके.
'मिशन आगमन' स्काईरूट का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है. इससे पहले कंपनी ने 18 नवंबर, 2022 को भारत के पहले निजी सबऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-एस' (Vikram-S) का सफल प्रक्षेपण किया था.
रॉकेट की खासियत और पेलोड
यह सात मंजिला ऊंचा रॉकेट पूरी तरह से कार्बन कंपोजिट संरचना से बना है और इसमें 3D-प्रिंटेड लिक्विड इंजन का इस्तेमाल किया गया है. यह रॉकेट लगभग 350 किलोग्राम तक के छोटे उपग्रहों को पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित करने में सक्षम है.
इस ऐतिहासिक परीक्षण उड़ान में कई वाणिज्यिक और तकनीकी पेलोड अंतरिक्ष में भेजे जा रहे हैं. इनमें भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों द्वारा विकसित किए गए चार प्रमुख उपग्रह शामिल हैं, जैसे ग्राह स्पेस (Grahaa Space) का सोलेरास S3 और कॉस्मोसर्व स्पेस (Cosmoserve Space) का एम्ब्रेस आर्म.
पीएम मोदी का संदेश और प्रतीकात्मक पेलोड
इस ऐतिहासिक मिशन को एक प्रतीकात्मक स्पर्श देते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित पोस्टकार्ड भी विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष की यात्रा पर जाएगा. स्काईरूट एयरोस्पेस के अनुसार, प्रधानमंत्री के इस पोस्टकार्ड पर "वंदे मातरम" लिखा हुआ है, जो इस परीक्षण उड़ान के विशेष पेलोड का हिस्सा है.
इसके अतिरिक्त, इस मिशन में स्काईरूट की टीम के सदस्यों, निवेशकों, नीति निर्माताओं और दुनिया भर के शुभचिंतकों के हस्तलिखित संदेश भी शामिल किए गए हैं. कंपनी ने इस पहल को "करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं और साझा समर्थन का उत्सव" बताया है. ये प्रतीक भारत के उभरते हुए निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र (Space Ecosystem) के सामूहिक प्रयासों को प्रदर्शित करते हैं.
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति होगी मजबूत
विक्रम-1 का यह सफल प्रक्षेपण वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेगा. यह मिशन देश के निजी अंतरिक्ष उद्यमों की तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन करने के साथ-साथ, वाणिज्यिक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार (Commercial Satellite Launch Market) में नए अवसरों के द्वार खोलेगा. भारत सरकार द्वारा 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों के बाद से देश में कई स्पेस स्टार्टअप तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 18, 2026 08:30 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

