साइंस

NASA की रिपोर्ट- विनाश की ओर बढ़ रही है दुनिया, 2100 तक मुंबई समेत भारत के कई शहर हो जाएंगे जलमग्न, जानें वजह

नासा की रिपोर्ट में भारत को लेकर बड़ा दावा किया है. नासा के अनुसार करीब 80 साल बाद यानी साल 2100 तक मुंबई समेत भारत के कई शहर समुद्री जलस्तर बढ़ने से करीब 2.7 फीट पानी में डूब जाएंगे.

NASA की रिपोर्ट- विनाश की ओर बढ़ रही है दुनिया, 2100 तक मुंबई समेत भारत के कई शहर हो जाएंगे जलमग्न, जानें वजह
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credits PTI)

नई दिल्ली: मौसम में हो रहे बदलाव के चलते दुनिया विनाश की ओर बढ़ रही हैं. कुछ ऐसा ही नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) की रिपोर्ट में भारत को लेकर बड़ा दावा किया है. नासा के अनुसार करीब 80 साल बाद यानी साल 2100 तक मुंबई, बेंगलुरु, विशाखापट्टनम, चेन्नई समेत भारत के करीब 12 शहर समुद्री जलस्तर बढ़ने से 2.7 फीट पानी में डूब जाएंगे और चारों तरफ पानी ही पानी नजर आयेंगे. आईपीसीसी (IPCC) हर 5 से 7 साल में दुनियाभर में पर्यावरण की स्थिति की रिपोर्ट देता है. इस बार की रिपोर्ट भारत को लेकर बहुत भयावह है.

वहीं इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मौसम विज्ञान वैज्ञानिक स्वप्ना पनिकल का कहना है कि समुद्र का चरम स्तर जो पहले 100 साल में एक बार होता था, वह 2050 तक हर छह से नौ साल में और हर साल 2100 तक हो सकता है. भारत पर इसके प्रभाव के साथ सोमवार को प्रकाशित एक संयुक्त राष्ट्र संगठन, इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) के जलवायु विज्ञान पर ज्ञान की स्थिति के सबसे बड़े अपडेट के निष्कर्षों के बारे में विशेष रूप से बात करते हुए, उन्होंने कहा कि वैश्विक महासागरों की तुलना में उच्च दर पर हिंद महासागर गर्म हो रहा है. यह भी पढ़े: Maharashtra Flood: के रायगढ़ में 103 गांवों पर मंडरा रहा भूस्खलन का खतरा, कई एक मंजिला इमारतें अभी भी जलमग्न

वैज्ञानिक स्वप्ना पनिकल के अनुसार समुद्र के स्तर में वृद्धि का पचास प्रतिशत थर्मल विस्तार द्वारा योगदान दिया जाता है, इसलिए हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्र का स्तर भी बढ़ रहा है, वैश्विक औसत समुद्र स्तर लगभग 3.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है जो 2006 से 2018 और के बीच अनुमानित है

पनिकल ने कहा "1.5 डिग्री पर, समुद्र के तापमान में एक डिग्री की वृद्धि होने की उम्मीद है. इसलिए, उसके अनुसार, वैश्विक समुद्र स्तर और हिंद महासागर समुद्र स्तर भी समान दर से बढ़ने का अनुमान है. पनिकल ने एक साक्षात्कार में आईएएनएस को बताया "20वीं सदी के मध्य से दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशियाई मानसून वर्षा में कमी का प्रमुख कारण मानवजनित एरोसोल फोसिर्ंग है, वार्षिक और गर्मियों में मानसून की वर्षा 21वीं सदी के दौरान बढ़ी हुई अंतर-वार्षिक परिवर्तनशीलता (मध्यम आत्मविश्वास) के साथ बढ़ेगी. (इनपुट एजेंसी)

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 10, 2021 06:54 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).