AI ने बनाए 16 नए वायरस, वैज्ञानिकों की बड़ी सफलता के साथ बढ़ी बायोसिक्योरिटी की चिंता, जानें पूरा मामला

यह पहली बार है जब किसी AI सिस्टम ने पूरा कार्यशील वायरल जीनोम तैयार किया है. इससे सिंथेटिक बायोलॉजी और फेज थेरेपी जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं. हालांकि, इसके साथ ही वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि AI आधारित जैविक अनुसंधान के लिए सख्त नियम, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना भी उतना ही जरूरी होगा.

नई दिल्ली, 8 अगस्त: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने विज्ञान की दुनिया में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है. अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और Arc Institute के वैज्ञानिकों ने AI की मदद से 16 नए कार्यशील (Functional) वायरस तैयार किए हैं, जो प्रयोगशाला में बैक्टीरिया को संक्रमित कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम पाए गए. हालांकि, इस उपलब्धि के साथ ही विशेषज्ञों ने बायोसिक्योरिटी (Biosecurity) और तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता भी जताई है.

AI की मदद से तैयार किए गए नए वायरस

शोधकर्ताओं ने Evo 1 और Evo 2 नामक Genome Language Models का इस्तेमाल करते हुए PhiX174 नामक बैक्टीरियोफेज (Bacteriophage) के आधार पर नए वायरल जीनोम तैयार किए.

करीब 300 AI-जनरेटेड जीनोम लैब में तैयार कर उनकी जांच की गई, जिनमें से 16 सफलतापूर्वक कार्यशील बैक्टीरियोफेज साबित हुए. ये वायरस E. coli बैक्टीरिया को संक्रमित कर नष्ट करने में सक्षम पाए गए.

क्या होते हैं बैक्टीरियोफेज?

बैक्टीरियोफेज (Phages) ऐसे वायरस होते हैं जो केवल बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं. ये इंसानों, जानवरों या पौधों को संक्रमित करने वाले वायरस से अलग होते हैं और मानव कोशिकाओं पर हमला नहीं करते. इसी वजह से वैज्ञानिक इन्हें भविष्य में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी (Antibiotic Resistant) बैक्टीरिया के इलाज के लिए उपयोगी मान रहे हैं.

AI ने कैसे किया यह काम?

Genome AI मॉडल सामान्य चैटबॉट्स से अलग होते हैं. जहां ChatGPT जैसे मॉडल शब्दों और वाक्यों को समझते हैं, वहीं Genome AI मॉडल DNA और आनुवंशिक (Genetic) सीक्वेंस के पैटर्न सीखते हैं और नए जीनोम तैयार कर सकते हैं.

इस अध्ययन में AI ने सिर्फ किसी एक जीन या प्रोटीन को नहीं, बल्कि पूरा वायरल जीनोम तैयार किया, जिसे बाद में प्रयोगशाला में विकसित कर उसकी कार्यक्षमता की जांच की गई.

एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंस से लड़ाई में मिल सकती है मदद

वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल Phage Therapy के लिए किया जा सकता है.

दुनिया भर में एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ते प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) के कारण कई बैक्टीरियल संक्रमणों का इलाज मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में AI से विकसित बैक्टीरियोफेज नई उपचार पद्धति विकसित करने में मददगार साबित हो सकते हैं.

हालांकि, फिलहाल यह केवल एक शोध उपलब्धि है और इसे किसी चिकित्सा उपचार के रूप में मंजूरी नहीं मिली है.

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

इस शोध के साथ ही कई विशेषज्ञों ने बायोसिक्योरिटी को लेकर चिंता जताई है. Johns Hopkins University के Center for Health Security के विशेषज्ञों ने कहा कि AI द्वारा वायरस डिजाइन करने की क्षमता भविष्य में दुरुपयोग का कारण बन सकती है. उनका कहना है कि ऐसी तकनीक के लिए कड़े सुरक्षा नियम और निगरानी जरूरी हैं, ताकि इसका इस्तेमाल केवल वैज्ञानिक और चिकित्सा अनुसंधान तक सीमित रहे. विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे वायरस विकसित करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए जो इंसानों में बीमारी फैला सकें.

वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

शोध का नेतृत्व करने वाले स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ब्रायन ही (Brian Hie) ने बताया कि उनकी टीम ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वायरस पर काम किया.

उन्होंने कहा कि AI मॉडल की ट्रेनिंग के दौरान मानव, पशु और पौधों को संक्रमित करने वाले वायरस के डेटा को शामिल नहीं किया गया था. साथ ही पूरा शोध सुरक्षित प्रयोगशाला में किया गया.

क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध?

यह पहली बार है जब किसी AI सिस्टम ने पूरा कार्यशील वायरल जीनोम तैयार किया है. इससे सिंथेटिक बायोलॉजी और फेज थेरेपी जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खुल सकती हैं. हालांकि, इसके साथ ही वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि AI आधारित जैविक अनुसंधान के लिए सख्त नियम, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना भी उतना ही जरूरी होगा.

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