AI Generated Virus: पहली बार एआई ने तैयार किए 16 जीवित वायरस; बायोसिक्योरिटी और जैविक हथियारों को लेकर वैज्ञानिकों ने जताई चिंता
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और आर्क इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने जनरेटिव एआई का उपयोग करके पूरी तरह से नए 16 क्रियाशील वायरस तैयार किए हैं. हालांकि ये वायरस केवल बैक्टीरिया को निशाना बनाते हैं और इंसानों के लिए सुरक्षित हैं, लेकिन इस तकनीक ने वैश्विक स्तर पर बायोसिक्योरिटी और जैविक हथियारों की आशंकाओं को लेकर बहस छेड़ दी है.
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वाशिंगटन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artifical Intelligence) (AI) के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक लेकिन संवेदनशील सफलता हासिल की है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और आर्क इंस्टीट्यूट (Arc Institute) के शोधकर्ताओं ने जनरेटिव एआई मॉडल का उपयोग करके प्रकृति में न पाए जाने वाले पूरी तरह से नए वायरस डिजाइन किए हैं. प्रयोग के दौरान एआई द्वारा लिखे गए जेनेटिक कोड से 16 क्रियाशील बैक्टीरिया-घातक (Bacteriophages) तैयार करने में सफलता मिली है.
वैज्ञानिक पत्रिका साइंस (Science) में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, यह पहला मौका है जब किसी एआई मॉडल ने किसी जीवित जीव के अलग-अलग जेनेटिक टुकड़ों के बजाय उसका पूरा 'इंस्ट्रक्शन मैनुअल' (Complete Genome) तैयार किया है. हालांकि ये वायरस केवल सुपरबग्स/बैक्टीरिया को नष्ट करते हैं और इंसानों, जानवरों या पौधों के लिए हानिकारक नहीं हैं, लेकिन इसने बायोसिक्योरिटी (Biosecurity) और जैविक हथियारों (Biological Weapons) के संभावित खतरों को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है. यह भी पढ़ें: HCLTech AI Investment: 3,292 कर्मचारियों की कटौती के बीच कंपनी एआई डेटा सेंटर्स में करेगी 3,500 करोड़ रुपये का निवेश
एआई मॉडल कैसे तैयार करता है डीएनए कोड?
इस अध्ययन में इस्तेमाल की गई तकनीक Evo 1 और Evo 2 नामक एडवांस्ड जेनेटिक लैंग्वेज मॉडल्स पर आधारित है. जिस तरह चैटजीपीटी जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) किसी वाक्य में अगले शब्द का अनुमान लगाते हैं, उसी तरह Evo मॉडल डीएनए स्ट्रैंड में चार रासायनिक अक्षरों (A, T, C, G) के अगले अनुक्रम का सटीक अनुमान लगाते हैं.
- डेटा ट्रेनिंग: इस एआई मॉडल को लाखों प्राकृतिक जीनोम और विशेष रूप से 'बैक्टीरियोफेज' (Bacteriophage) परिवारों के डेटा पर ट्रेन किया गया.
- डिज़ाइन जनरेशन: सिस्टम ने सैकड़ों-हजारों संभावित वायरल डिज़ाइनों के कोड जनरेट किए.
- लैब टेस्ट: शोधकर्ताओं ने लगभग 300 सबसे सटीक कोड चुने और उन्हें प्रयोगशाला में सिंथेसाइज कर बैक्टीरिया में प्रवेश कराया। बैक्टीरिया की कोशिकाओं ने उस एआई कोड को पढ़कर जीवित और सक्रिय वायरल कण (Viral Particles) बना दिए.
सुपरबग्स के खिलाफ असरदार, लेकिन दोहरे इस्तेमाल का जोखिम
प्रयोगशाला परीक्षणों में पाया गया कि एआई-डिजाइन किए गए ये 16 वायरस प्राकृतिक वायरस की तुलना में अधिक तेजी से बढ़े और उन्होंने 'ई. कोलाई' (E. coli) जैसे एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया के स्ट्रेन को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया.
इस सफलता से दवा उद्योग में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बीमारियों का इलाज तेजी से ढूंढने में मदद मिल सकती है. हालांकि, नीति विश्लेषकों और वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि Evo 2 जैसे मॉडलों की ओपन-सोर्स उपलब्धता से 'डबल-यूज़' (Dual-Use Risk) का खतरा है—यानी इसका इस्तेमाल सुरक्षात्मक दवाओं के साथ-साथ खतरनाक महामारी फैलाने वाले सिंथेटिक रोगजनकों (Pathogens) को डिजाइन करने में भी किया जा सकता है.
बायोसिक्योरिटी और सख्त अंतरराष्ट्रीय नियमों की मांग
वर्तमान में दुनिया के किसी भी देश में कंप्यूटेशनल बायोलॉजी और एआई-जनरेटेड जीनोम को नियंत्रित करने के लिए कोई बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय नियम मौजूद नहीं हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि वायरल जीनोम जनरेट करने वाले सॉफ्टवेयर अब मौजूदा विनियामक ढांचों (Regulatory Frameworks) से काफी आगे निकल चुके हैं. हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने Evo 2 के ट्रेनिंग डेटासेट से इंसानों को संक्रमित करने वाले हानिकारक रोगजनकों को पूरी तरह बाहर रखा है, फिर भी वैश्विक स्तर पर एआई बायो-सुरक्षा दिशानिर्देश तय करने की मांग तेज हो गई है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 07, 2026 05:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

