Sreesanth Injury Controversy: पूर्व भारतीय क्रिकेटर एस. श्रीसंत अपने करियर में कई बार विवादों में रहे हैं और उनके संन्यास के बाद भी चर्चाएं उनका पीछा नहीं छोड़ रही हैं. अब एक दशक से ज्यादा पुराने IPL 2012 के एक बीमा (इंश्योरेंस) विवाद को लेकर राजस्थान रॉयल्स और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के बीच सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई छिड़ गई है. इस मामले में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रीड्रेसल कमीशन (NCDRC) ने राजस्थान रॉयल्स के पक्ष में फैसला सुनाया और इंश्योरेंस कंपनी को 82.8 लाख रुपये 9% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया था. अब यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने NCDRC के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनका तर्क है कि श्रीसंत की पहले से ग्रसित चोट को जानबूझकर छुपाया गया और बीमा पॉलिसी की 'अत्यधिक सद्भावना' (utmost good faith) से खिलवाड़ हुआ. लंदन में अकेले फिटनेस टेस्ट देने पहुंचे विराट कोहली, BCCI के इस फैसले पर उठे सवाल
क्या है पूरा मामला?
आईपीएल(IPL) 2012 के दौरान श्रीसंत राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल रहे थे, लेकिन प्रैक्टिस के दौरान चोटिल होकर पूरे सीजन से बाहर हो गए. फ्रेंचाइज़ी ने टीम के लिए लगभग 8.7 करोड़ रुपये का स्पेशल इंश्योरेंस लिया था और श्रीसंत के चोट के कारण खेलने से वंचित रहने पर 82 लाख रुपये का क्लेम फाइल किया हैं. इंश्योरेंस कंपनी ने यह दावा अस्वीकृत कर दिया हैं. उनका कहना था कि श्रीसंत वर्ष 2010-11 से ही टखने और घुटने की चोट से जूझ रहे थे और यह तथ्य निर्धारित समय पर उजागर नहीं किया गया था, जिससे पॉलिसी के नियमों के तहत क्लेम अस्वीकार कर दिया गया था.
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें
इंश्योरेंस कंपनी ने मेडिकल विशेषज्ञों की रिपोर्ट का हवाला दिया जिसका कहना है कि श्रीसंत की घुटने की चोट नई नहीं थी, बल्कि पहले से चली आ रही थी. वहीं, राजस्थान रॉयल्स ने दावा किया कि श्रीसंत की टखने की चोट मामूली थी और वह खेल सकते थे; उनकी अनुपस्थिति केवल प्रैक्टिस में लगी घुटने की नई चोट के कारण थी. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान इंश्योरेंस कंपनी से श्रीसंत का फिटनेस सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज जमा करने को कहा है.












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